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Tuesday, July 26, 2011

दिग्गी हो या हो पिग्गी !!

चिल्ले-पिल्ले, आंडू-पांडू
ढोल-नगाडे, डफ़ली-बाजा
पीटम-पीट, धमा-चौकडी
अकड रहा है, जकड रहा है
बेमतलब का भिड रहा है
मारो मारो, पकडो पकडो
दे दो एक पटकनी उसको
दिग्गी हो या हो पिग्गी !
धोबी पछाड दिखाओ उसको
उठा-उठा के पटको उसको
है इसकी दुम टेडी की टेडी
आदत से मजबूर हुआ है
भौं भौं करता घूम रहा है
अच्छा-बुरा सब भूल गया है
अकड रहा है, जकड रहा है
बेमतलब का भिड रहा है
मारो मारो, पकडो पकडो
दे दो एक पटकनी उसको
दिग्गी हो या हो पिग्गी !!

Friday, April 8, 2011

दुर्भावनाओं से ग्रसित नामी-गिरामी कलमकार !!

हालांकि यह सवाल खडा करना कि कलमकार दुर्भावनाओं से ग्रसित होते हैं, खुद को सवालों के कठघरे में खडा करने जैसा है ! सवाल के उठने के सांथ ही आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ सकता है किन्तु आलोचनाओं से बचने या भागने के चक्कर में इस महत्वपूर्ण ज्वलंत विषय पर लिखने से खुद को रोक पाना मुश्किल है ! वर्त्तमान समय में फेसबुक पर नए, उभरते, संघर्षशील, स्थापित, कलमकारों से अक्सर सामना पड़ते रहता है सामना पड़ने से तात्पर्य रु--रु मुलाक़ात से नहीं है वरन उनके लेखन से सामना होने से है, जिसमें कवि, लेखक, आलोचक, समीक्षक, विश्लेषक, सभी तरह के कलमकार हैं जिसमें कुछेक मीडिया जगत से भी हैं !

फेसबुक पर सामान्यतौर पर छोटी-छोटी पोस्टों का चलन ज्यादा है दो लाइन, तीन लाइन में कलमकार जो उसकी मर्जी में आता है ठूंस देता है, प्रभावशाली कलमकारों के द्वारा ठूंस दी गई दो-तीन लाइनों को पढ़कर कभी कभी तो हंसी जाती है, हंसी इसलिए कि अगर कोई नया-नवेला कलमकार लिखे तो कोई बात नहीं किन्तु नामी-गिरामी लोग लिखें तो पढ़कर हंसी निकलना जायज है ! कभी कभी तो ऐसा लगता है कि इतना प्रतिष्ठित कलमकार और इतनी वाहियात लेखनी, जिसे पढ़कर अजीब सा महसूस हो, क्या करें वहां पर टिप्पणी की इच्छा होती है पर बड़ी मुश्किल से खुद को भिड़ने से रोकना पड़ता है, रोकना इसलिए कि यदि नहीं रुके तो टिप्पणी के परिणाम स्वरूप तना-तनी की पूर्णरूपेण संभावना रहेगी, तना-तनी हो ये और बात है !

इस चर्चा के असल मुद्दे पर आते हैं कि कलमकार दुर्भावनाओं से ग्रसित हैं यह कैसे जान पड़ता है ! तो सुनिए, जब एक जाना-माना स्थापित कलमकार, क्रिकेट टीम में खिलाड़ियों के चयन पर जातिगत चर्चानुमा पोस्ट ठेल दे कि फंला जाती के लोगों को स्थान नहीं है फंला जाती के लोगों को महत्त्व ज्यादा मिल रहा है वगैरह वगैरह ! ठीक इसी प्रकार कोई स्थापित चर्चित कलमकार यह पोस्ट लगा दे कि अन्ना हजारे के आन्दोलन का विरोध करते हैं, कोई यह लिखे कि जन लोकपाल के गठन से क्या भ्रष्टाचार मिट जाएगा, भईय्या कोई मुझे ये बताये कि क्रिकेट टीम के चयन में जात-पात की चर्चा का औचित्य क्या है, ठीक इसी प्रकार जब आप अन्ना हजारे जैसी सकारात्मक पहल नहीं कर सकते तो विरोध करने की जरुरत क्या है, भ्रष्टाचार मिटेगा या नहीं यह तो लोकपाल के गठन के बाद समझ आयेगा फिलहाल तो सारा का सारा देश भ्रष्टाचार की चपेट में है जब कोई सार्थक सकारात्मक पहल हो रही है तब सवाल खड़े करने की जरुरत क्या है !

ठीक इसी प्रकार यह सर्वविदित सत्य है कि वर्त्तमान में अपने देश में ईमानदार लोगों को तलाशना कठिन काम है, अब जो लोग अन्ना हजारे के समर्थन में खड़े हैं वे कितने ईमानदार हैं या कितने बेईमान हैं इस सवाल को उठाने की जरुरत ही क्या है ! क्या बेईमान हैं तो अच्छे, सार्थक सकारात्मक कार्य में योगदान नहीं दे सकते, जरुर दे सकते हैं और देना ही चाहिए, अभी तक किसी ने पहल नहीं की थी इसलिए बेईमान थे किन्तु अब इमानदारी के रास्ते पर चल पड़े हैं ! अब इन बुद्धिमान कलमकारों को कौन समझाये कि रातों-रात तो कोई काम हो नहीं सकता, सार्थक सकारात्मक पहल तो करनी ही पड़ेगी, और जब कोई सार्थक सकारात्मक कदम उठा रहा है तो उसमें नुक्ताचीनी की जरुरत क्या है ! मेरा तो ऐसा मानना है कि कलमकारों को जातिगत, राजनैतिक, व्यक्तिगत सामाजिक दुर्भावनाओं से परे रहकर सार्थक सकारात्मक लेखन की ओर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए, और यदि आलोचना करना जरुरी ही है तो सभी पहलुओं पर गंभीर मनन-चिंतन के बाद ही पहल करनी चाहिए, कि क्षणिक वाह वाही के लिए जो मन में आये उसे ठोक दो !!

Friday, December 10, 2010

ब्लॉग चटा चट ....... "मुन्नी बदनाम हुई" बीयर बार !

भईय्या ... भईय्या ... अरे अनुज क्या हो गया, सांस ले ले पहले ... नहीं भईय्या, बात ही कुछ ऐसी है कि आपसे पूछने को मन मचल रहा है !
... हाँ बता अब क्या समस्या लेकर घूम रहा है ... नहीं भईय्या समस्या नहीं, एक सुझाव ... हाँ हाँ बोल क्या बात है !

... भईय्या वो चिट्ठाज ... अरे रे रे रे ... नहीं भईय्या आपकी भाषा में ... वो बिनाका गीतमाला है ना ... हाँ क्या हो गया उसको, अच्छी खासी तो दौड़ रही है, गुरुओं चेलाओं की मंडली की जय जयकार है !
... वो तो सब ठीक है भईय्या, पर समस्या कुछ दूसरी है ... क्या है !

... भईय्या कल शाम को मैं "मुन्नी बदनाम हुई" बार में बैठकर बीयर पी रहा था, वहीं पर बिनाका गीतमाला का मालिक अपने किसी शिष्य के साथ पैक के मजे लेते लेते चिंता जाहिर कर रहा था कि - बहुत बदनामी हो रही है ये गुरु-चेले मिल मिल कर वही घिसे-पिटे ४० गाने बजाने में मस्त हैं जनता अब इन गानों ... भईय्या भईय्या जिन्दावाद ... भाई भतीजा जिन्दावाद ... अपनी डफली अपना राग ... बिना टिप्पणी जिन्दावाद ... कोई पढ़े जिन्दावाद ... चेले चपाटे जिन्दावाद ... तू मेरी खुजा मै तेरी खुजाऊँ ... जैसे घिसे-पिटे गानों से नाराजगी झेलनी पड़ रही है !

... अरे ये बात है तो उसे यह बदनामी वाला सिस्टम बंद कर देना चाहिए ... बातों से तो लगा कि वह आज ही बंद कर दे, पर कोई विकल्प की तलाश में लग रहा है ... ऐसा है क्या ! चल एक काम कर, अगर तुझे दोबारा दिखाई दे तो उसे ये नया फार्मूला बता देना !

... वो क्या है भईय्या ... बताना कि सर्वप्रथम तो वेबसाईट का कनेक्शन कट करे सिर्फ ब्लॉग ही रखे, ... ये ब्लॉग के बीच में वेबसाइटों का घुचड़-पुचड ठीक नहीं है और ये हवाले-घोटाले जैसे घटिया सिस्टम बंद कर दे ... सिर्फ एक फार्मूला रखे "सर्वाधिक पढ़े गए" को आधार बना कर रेंकिंग सिस्टम लागू कर दे वो भी "पिछले तीन-तीन महीने को आधार" मानकर ... समझा नहीं भईय्या, तीन तीन महीने से क्या मतलब है ! ... मेरा मतलब यह है कि पिछले तीन महीने में जो ब्लॉग सर्वाधिक पढ़े जा रहे हैं वे ब्लॉग ही रेंक में टाप पर रहें, इस तरह एक-दो दिनों की आड़ में रेंकिंग ऊपर-नीचे स्वमेव होते रहेगी या जो दमदार ब्लॉग होगा वो टाप पर बना रहेगा ... इस सिस्टम से गुरु-चेलों, भाई-भतीजों तथा खुजा-खुजाऊँ सब को अपनी अपनी औकात समझ में जायेगी ... और बिनाका गीतमाला की गिरती छबी खुद खुद सुधर कर टाप पर पहुँच जायेगी ... भईय्या प्रणाम मान गया आपके दिमाग को ... प्रणाम !!!

Friday, December 3, 2010

नंगी थी, क्या चंगी थी !

नंगी थी, क्या चंगी थी
सारे जग में, चल पडी थी !

भाग रहे थे, सिमट रहे थे
खड़े खड़े सब, सूत रहे थे !

मिल गई थी, मिल रही थी
खूब मजे,सब लूट रहे थे !

रही थी, जा रही थी
लूट रहे थे, लुट रहे थे !

इधर चली, उधर चली
क्या गजब, मनचली थी !

नांच रही थी, नंगी थी
शीत लहर थी, चंगी थी !

नंगी थी, पर चंगी थी
क्या गजब की ठंडी थी !!!

Sunday, October 24, 2010

ब्लॉग चटा-चट ... गुरु-चेला ! (०२)

चेला - भईय्या आप ब्लागजगत के नामी, गिरामी, धुरंधर ब्लॉगर हो ... पर मैं देखता हूँ कि आप दो-दो, चार-चार दिन तक पोस्ट नहीं लगाते और जब लगा भी देते हो तब कोई पढ़ने भी नहीं आता ... मेरा मतलब टिप्पणियों से है फिर भी रेंकिंग में चालीस की लिस्ट में बने हुए हैं ... मानना पडेगा, प्रणाम भईय्या !
गुरु - ये अपुन का स्टाईल है बिडू ... इसलिए ही तो लोग अपुन को खटरंग ब्लॉगर मानते हैं ... बोले तो धुरंधर ब्लॉगर !

चेला - वाह भईय्या वाह मानना पडेगा आपके स्टाईल को ... पर भईय्या ऐसा कब तक चलता रहेगा ... लोग पोस्ट पढ़ने नहीं आते ... आठ-दस आते भी हैं तो बिना टिप्पणी के चले जाते हैं ... कहीं आपकी रेंकिंग जमीन पर न आ जाए और आपका ब्लॉग 'धूल' चाटते न रह जाए !
गुरु - अबे चिरकुट ये भी अपुन का स्टाईल है .... जिसको पढ़ना है पढ़े न पढ़ना है न पढ़े ... जिसको टिपियाना है टिपियाये नहीं तो भाड़ में जाए ... अपुन ने ऐसी सेटिंग बैठाल कर रखी हुई है कि कोई भी अपुन का रेंकिंग नहीं बिगाड़ सकता ... मंच्च, वार्टा, चौप्पाल ये सब अपुन के चेले हैं पोस्ट लगाने के पहले अपुन को सेल्यूट जरुर मारते हैं ... अब तू शागिर्दगी में ही गया है तो धीरे धीरे सब सीख जाएगा ... हा हा हा !

Sunday, October 3, 2010

ब्रेकिंग पोस्ट ... जय जय ब्लागिंग ... !!!

... यह जानकर अत्यंत खुशी हुई कि "हमारीवानी डाट काम " ने साइडबार में पोस्टों की रेंकिंग का सिस्टम बदल दिया है ... अब वह पोस्ट ही ऊपर दिखाई देगी जिसे ज्यादा पढ़ा जाएगा ... यह कदम बेहद प्रसंशनीय है ... बधाई व शुभकामनाएं ... आपके इस प्रयास से संभव है ब्लागिंग में कुछ सुधार दिखाई दे ... कम से कम वे लोग जो पोस्ट को ऊपर-नीचे करने में माहिर रहे हैं उन्हें कुछ मसक्कत का सामना करना पड़े ...

... हमारीवानी की तरह ही यदि चिट्ठाजगत भी कुछ सुधार कर ले तो ब्लागिंग के लिए बेहतर होगा ... बेहतर, बहुत ही बेहतर होगा ... जिन लोगों ने पोस्ट व ब्लॉग को हिट करने की दुकानें खोल रखी हैं, मेरा मतलब जो हवाले-घोटाले के माध्यम से ब्लॉग को रेंकिंग देने में मस्त हैं उनसे है ... ये क्या बला है, भाई जी यह बला नहीं मजाक-जोक से कम नहीं है ...

... कुछ महानुभावों ने चर्चा / वार्ता / मंच / जंक्शन जैसे ब्लॉग खोल रखे हैं उनको खोलने के पीछे का मकसद ... मकसद यही है कि वे लिंक-पे-लिंक दे कर ब्लॉग को चिट्ठाजगत की टाप रेंकिंग पर पहुंचा सकें ... जिन पोस्टों को कोई पढ़ना भी नहीं चाहता उन्हें ये महाशय लिंक दे कर रेंकिंग में हिट करने में मस्त हैं ... धन्य हैं ऐसे महानुभाव ... और धन्य है चिट्ठाजगत जो "आँख मूंदकर" यह सब करवा रहा है ... धन्य है ब्लागजगत ... धन्य है ब्लागिंग ... जय जय ब्लागिंग ... !!!

Monday, September 27, 2010

खोटा सिक्का

सिक्का खोटा है
तो क्या हुआ
फेंक दोगे
तो क्या होगा
शायद कुछ नहीं !

पडा रहने दो जेब में
क्या फर्क पड़ता है
संभव है किसी दिन
काम जाए
क्या काम आयेगा !!
शायद कुछ नहीं !

पर, संभव है
किसी दिन
किसी दोराहे पर
वही खोटा सिक्का
हेड-टेल के
काम जाए

जीत कर
एक बाजी
नई मंजिल
नई दुनिया
का बादशाह
बना जाए

खोटा है
तो रहने दो
पर जेब में
पडा रहने दो
संभव है
किसी दिन
काम जाए !!!

Thursday, September 9, 2010

... भईय्या रुको एक मिनट ... मैं तत्काल आके बताता हूँ !!!!!!!!

ब्लागिंग बंद कर दो !
क्यों, क्या हो गया !

अब ब्लागिंग का कोई औचित्य नहीं है !
क्यों, किसलिए !

अब इसमें पूछने वाली क्या बात है !
जब तक आप बताओगे नहीं तो कैसे पता चलेगा !

भईय्या अब इसमें पूछने, बताने वाली क्या बात है, क्या आप को नहीं दिख रहा !
क्या भईय्या, हमें कुछ नहीं दिख रहा !

क्या तुम्हे नहीं दिख रहा की क्या हो रहा है ब्लागजगत में !
हम ठहरे नौसिखिया, हमें कुछ दिखता नहीं है, दिखता भी है तो कुछ समझ नहीं आता !

अरे ऐसा बोलो की सब मूकबधिर हो गए हो !
नहीं भईय्या, हम मूकबधिर नहीं हुए हैं !!!

अरे हाँ, बुद्धिजीवी लोग हैं, संभव ही नहीं है !!!
सीधा सीधा बोलो, क्या बोलना चाहते हो !

अब मैं कौन होता हूँ, बुद्धिजीवी वर्ग के बारे में बोलने वाला !!
नहीं नहीं बताओ, क्या बोलना चाहते हो !

अरे भाई, मैं कुछ बोलना नहीं चाहता, जानना चाहता हूँ !
क्या जानना चाहते हो !!

अरे भाई मैं सिर्फ इतना जानना चाहता हूँ कि क्या अब ब्लागजगत में अच्छे लेखन की क़द्र ख़त्म हो गई है जो कुत्ते-बिल्ली-चूहे की फोटो, जन्मदिन की खबरें, बच्चों के ब्लॉग, बच्चों की फोटोज, बच्चों की पेंटिंग्स, या फिर जो एक-दूसरे की पींठ खुजा रहे हैं उनकी पोस्टें ही हिट होंगी ???????
... भईय्या रुको एक मिनट ... मैं तत्काल आके बताता हूँ !!!!!!!!

Wednesday, August 18, 2010

ब्लागिंग बाजार

चल रहे हैं
जो सिक्के
ब्लागिंग बाजार में,
वही असली हैं

फिर
भले चाहे
वो खोटे,
या चमड़े के हैं,

चलने
वालों की
जय जय
तो चलाने वालों की
जय जय

जय जय ब्लागिंग !

Wednesday, August 11, 2010

क्या मिला उनको बम फोड़ने से !

बोल बम बोल बम गूँज रहा था
बाहर कोई बेवजह बम फोड़ रहा था
मर गए दो-चार बम फूटने से
क्या मिला उनको बम फोड़ने से

अल्लाह-ओ-अकबर के नारे गूँज रहे थे
बाहर कोई बेवजह बम फोड़ रहा था
मर गए आठ-दस बम फूटने से
क्या मिला उनको बम फोड़ने से

जय माता दी, जय माता दी सब गा रहे थे
बाहर कोई बेवजह बम फोड़ रहा था
मर गए तीन-चार बम फूटने से
क्या मिला उनको बम फोड़ने से !

Monday, August 2, 2010

ब्लॉगर ही ब्लॉगर हैं !

ब्लागिंग समुन्दर है
ब्लॉग कस्ती है
ब्लॉगर नाविक है
लहरें ही लहरें हैं
हिचकोले ही हिचकोले हैं
तूफां ही तूफां हैं
मौजे ही मौजे हैं

ब्लॉग रूपी कस्ती
बीच समुन्दर में
रह जाती है फ़स
नहीं दिखता रस्ता
झटके ही झटके हैं
गोते ही गोते हैं
समुन्दर ही समुन्दर है
ब्लॉगर ही ब्लॉगर हैं !

Friday, July 30, 2010

खाओ-पिओ ..... मौज-उडाओ !

इडली-दोसा
सादा-सादा
छोले-भठूरे
तीखा-तीखा
पाव-भाजी
मौजा-मौजा
गुपचुप-चाट
सरपट-सरपट
खाओ-पियो
मौज-उडाओ

दही-समोसा
जलेबी-रबडी
हलुवा-पुडी
माल-पुआ
रस-मलाई
मलाई-चाप
खाओ-पिओ
मौज-उडाओ

दाल-बाटी
बैगन-भर्ता
चटनी-टमाटर
लिट्ठी-चोखा
चिकन-तंदूरी
चिल्ली-चिकन
मटन-बिरयानी
कीमा-कलेजी
सूतम-सूत
डकार-डकार
खाओ-पिओ
मौज-उडाओ !

Tuesday, July 27, 2010

..... क्योंकि वह पाठक है !

लिखो, खूब लिखो
पर पढेगा कोई नहीं
अगर पढेगा भी
तो अभिव्यक्ति
जाहिर नहीं करेगा

क्यों नहीं करेगा !
उसकी मर्जी
करे तो ठीक
न करे तो ठीक
कोई जोर-जबरदस्ती
तो है नहीं
वह भी अपनी
मर्जी का मालिक है

आखिर वह भी पाठक है
उसका भी स्वाभिमान है
मान है, मर्यादा है
अच्छा - बुरा जानता है
समझता है
कोई उस पर दवाब
कतई नहीं डाल सकता

दवाब डालना
उचित भी नहीं है
क्या उसने आप पर
दवाब डाला
लिखने के लिए
नहीं, कतई नहीं डाला

फिर आप कौन होते हो !
उसे बाध्य करने के लिए
अभिव्यक्ति के लिए
ज़रा सोचो
अगर पाठक न हों
तो आपके लिखने का
औचित्य क्या रहेगा

इसलिये लिखो
उसे पढ़ने दो
अपनी-अपनी
मर्जी के साथ
मौज के साथ
भावनाओं के साथ
संवेदनाओं के साथ
क्यों, क्योंकि वह
पाठक है !

Saturday, July 24, 2010

जय जय ब्लागिंग !!!

क्या पोस्ट है
हिट है
टिप्पणियों की भरमार है
हिट है
ब्लागरों की भीड़ है
हिट है
माडरेशन का दौर है
हिट है

हिट थी
हिट है
पर आज सुपर हिट है
हिट है
ब्लोगिंग एक खेल है
हिट है
जय जय कार है
हिट है
जय जय ब्लागिंग !!!

Wednesday, July 21, 2010

टिप्पणियों का फ़र्जीवाडा

जिस पोस्ट पर हमने
प्यार से दो-दो टिप्पणी ठोकीं
आज वही पोस्ट
मेरी पोस्ट से आगे निकली

लेकिन अफ़सोस
कि उस ब्लागर ने
किया फ़र्ज अदा अपना
कम से कम एक टिप्पणी की
नजाकत तो बनती थी
उसकी एक टिप्पणी से
मेरी पोस्ट नंबर दो पे होती

खैर कोई बात नहीं
जो पोस्ट नं- पर है
उसकी बुनियाद भी
मेरी टिप्पणी पर है

यहां तक तो सफ़र
बिना अफ़सोस के गुजरा था
जब आई बात नं- की तो
मेरी पीठ पर खंजर उतरा था

इस पोस्ट की
नं- और नं- ने
जो खुशामद की थी
दो-दो ठोक कर टिप्पणी
अदावत की थी

चलो कोई बात नहीं
हम हार के खुश हो लेते हैं
जीतने वालों को दुआ देते हैं
इन हालात में
और क्या कहते हम
ब्लागिंग को अलविदा कहते हैं !!!

Saturday, July 17, 2010

...................... ब्लागिंग नशा है !!!

ब्लागिंग नशा है
हम आदि हैं
रोज लेते हैं मजा
चुस्की की तरह

कभी एक पोस्ट में ही
हो जाता है नशा
और कभी
फ़ट जाता है नशा
एक ही टिप्पणी से

और जब कभी
बढ जाता है नशा
तो भटकते फ़िरते हैं
ब्लाग दर ब्लाग
ठोकते-पीटते टिप्पणियां
किसी को खरी-खोटी
तो किसी को चिकनी-चुपडी

जब उतरता है नशा
तो वापस पहुंचते हैं
अपनी ब्लागरूपी कस्ती पे
और सो जाते हैं
शट-डाउन कर
नशे मे चूर हो कर !

Saturday, July 10, 2010

काफ़ी हाऊस ... टी.व्ही. न्यूज एंकर टेंशन में !!!

काफ़ी हाऊस ... दोपहर का टाईम ... बोले तो टाईम पास का टाईम ... टाईम पास बोले तो थोड़ा फ़ुर्सत का टाईम ... मतलब चाय, काफ़ी, सिगरेट बगैरह बगैरह ... अरे भाई ये तो कहने का है, सच बोले तो टेंशन का टाईम ... टेंशन बोले तो नौकरी का टेंशन, खबर का टेंशन, न्यूज का टेंशन, बॉस का टेंशन .... टेंशन ही टेंशन भाई ... अरे यार इतना टेंशन तो काए को नौकरी करता है ... इसीच्च लिये तो इधर बैठा है भाई ... चल चल टेंशन लेने का नहीं अपुन गयेला है ... अपुन बोले तो अपुन का बॉस "उदय" रहेला है ... झक्कास ... अभीच्च आप लोगों का टेंशन ... बोले तो चुटकी में खल्लास ... "उदय" कौन ... बोले तो कुछ भी नहीं पर बहुत कुछ है ... कुछ लिखता-पढता है .... "सॉलिड दिमाग" रखता है भाई ...

... "उदय" का इंट्री ... बोले तो ... काफ़ी हाऊस चका-चका ... सब टाईम-टू-टाईम ... बॉस सल्यूट मारता है ... हां हां क्या हाल चाल है .. सब झक्कास बॉस ... आपका आर्डर रेडी हो रहेला है ... बस एक-दो मिनट ... बॉस, बाजु बाला टेबल मे कुछ टेंशन ... बता बता क्या बात है ... बोले तो बडे लोग हैं ... चल चल बोल, छोटा-बडा छोड ... भाई ये सब टेंशन में बैठेईला है ...क्या हुआ बता ... टी.व्ही. न्यूज वाले हैं ... बता बता क्या बात है ... इनका नौकरी खतरे में लग रहेला है ... कुछ मदद मांगता क्या? ... हां बॉस ... बुला बुला ...

... "उदय" की टेबल पर न्यूज चैनल वाले ... आईये आईये ... कैसे हैं ... कुछ खास नहीं बस यूं ही ... बोलो बोलो अभी अभी ये वेटर बोल रहा था कि आप लोग टेंशन में है ... हां 'उदय भाई' टेंशन तो है पर क्या बताएं शर्म आती है ... बिंदास बोलो क्या बात है ... सभी एंकर एक साथ बोल पडे ... बॉस का टेंशन है भाई ... बोले तो बास चाहता है कि कुछ नया करो ... नया करो ... पच्चीस न्यूज चैनल चल पडेला है ... नया खबर लायें तो कहां से लायें ... बस यहीच्च टेंशन है ... बस इत्ती सी बात ...

... तुम लोग सारी दुनिया को टेंशन देता है और खुदिच्च टेंशन में हो ... सब लोग कान "खुजा" के बैठो अपुन एक बार बोलेगा ... रिपीट करने को नई मांगता ... पाव-भाजी, समोसा-गुपचुप दिखाया हिट था ... पानी पर चलना दिखाया हिट था ... रावण का ममी दिखाया हिट था ... अब गौर से सुनो ये कोई खबर था क्या ... नई था सब बकवास था ... पर हिट था ... ये अपुन के देश का जनता है ... हर टाईम टोपी पहनने को घूमते रहता है बस नया आदमी चाहिये टोपी पहनाने वाला ... लो एक "मंत्र" ले जाओ ... सब लोग अपने अपने बॉस के कान में "फ़ूंक" दो ... "मायने यह नहीं रखता कि पब्लिक क्या देखना चाहती है, मायने यह रखता है कि हम क्या दिखाना चाहते हैं" ... क्या समझा ... बोले तो ... "मायने यह नहीं रखता कि पब्लिक क्या देखना चाहती है, मायने यह रखता है कि हम क्या दिखाना चाहते हैं" ... थैंक्यू बॉस ... थैंक्यू ... !!!!

Sunday, June 20, 2010

क्रिकोटत्व - 2010 ........ब्लाग फ़िक्सिंग !!!!!

.... दुबई से फ़ोन की घंटी बजी .......... हां भाई, क्या आदेश है .......... ये क्या बकबास चल रहा है ... तू ये क्या बकबास कर रहिला है ..... साले तुझे और कोई काम नही है क्या जो ये क्वीज चालू कर रखीला है ...

.... क्या हो गया भाई मैं तो आपका चेला हूं ... जो आप कहिते हो बहिस करता हूं ... क्या गुस्ताखी हो गईला बॉस .... माफ़ी मांगता हूं ...

... चल चल ठीक है ... कोई बात नहीं ... पर तूने ये जो ... बेस्ट ब्लागर .... बेस्ट टिप्पणीकार .... बेस्ट सपोर्टर .... बेस्ट चापलूस ... बेस्ट चमचे .... बेस्ट चिरकुट ....

... इस खेल को बंद कर .... नहीं तो तेरो को ईच उठाना पडेगा ... ये क्या नौटंकी है ... तुझे नहीं पता कि कौन मेरा पसंदिदा ब्लागर है ... फ़िर क्यों ये नौंटकी चालू कर लेईला है ... चल बंद कर ये क्रिकोटत्सव ... नहीं तो तेरी वाट लगा दूंगा ... समझा ... क्या समझा ... (फ़ोन कट ) .... .....

... लगता है बॉस नाराज है ... चल चल बंद कर ये ... बाद में देख लेंगे .... .... .... .... जान रहेगी तो जहान रहेगी ... ... .. ... ... ...
(निर्मल हास्य)

Saturday, June 19, 2010

"भाऊ का इंटरनेशनल सर्कस"

चलिये आज चर्चा करते हैं इंटरनेट जगत के विश्व प्रसिद्ध सर्कसकार "भाऊ" .... भाऊ एक ऎसा नाम जिसे इंटरनेट की दुनिया के बच्चे बच्चे , महिला-पुरुष सभी जानते हैं ... उनकी कहानियां मुंहजुबानी कुछ महानुभाव व महापुरुष टाईप के बुद्धिजीवियों के पास सुनने मिल जायेंगी ...

... भाऊ का सर्कस ... एक हंसीला-जोशीला सर्कस है जो जबरदस्त कामेडी है ... इस सर्कस के मुख्य किरदार ... सल्पना मैडम, सर्मीला मैडम, भालित बाबू, बगैरह ... और स्वंय जोशीले-हटीले भाऊ ... इस सर्कस पर अक्सर बर्फ़ के गोले, गुपचुप के ढेले, अंगूर के रस, अस्पताली कारनामें, भंग के गोले, जंतर-मंतर के अजब-गजब कारनामें पेश किये जाते हैं ये कारनामें भी गोल्डन होते हैं यहां से करोडों रुपये जीते जा सकते हैं क्योंकि यहां सब गोल्डन ही गोल्डन है ...

... इस सर्कस का मुख्य आकर्षक आईटम है ... चुटकुलों का जंतर-मंतर ... जी हां ... यहां आये-दिन चुटकुले पटक दिये जाते हैं यह एक जंतर-मंतर नुमा खेल है ... इसमें कुछ बुद्धीजन घुस जाते हैं जो सफ़लतापूर्वक निकल आते हैं उन्हें पुरुष्कार स्वरूप एक "छडी" प्रदाय की जाती है और उन्हें आजीवन सर्कस का सदस्य बना लिया जाता है फ़िर वे भी सर्कस के हिस्से बन जाते हैं और किसी न किसी आईटम कार्यक्रम में छडी हिलाते देखे जाते हैं ... सभी "छडी" धारकों के फ़ोटो सर्कस के गेट पर व संपूर्ण मेले में लगाये जाते हैं ... ताकी कुछ और झमूरे आकर्षित होकर पहुंचे ...

... फ़िलहाल तो भाऊ का इंटरनेशनल सर्कस सफ़लता पूर्वक जारी है ... नई ऊंचाईयों को छू रहा है ... हमारी भी शुभकामनाएं हैं कि भाऊ अपने सर्कस में कुछ नये झमूरे और शामिल करें तथा सर्मीला मैडम का एक आईटम सांग प्रत्येक शो मैं अवश्य रखें ... साथ ही साथ भालित बाबू को भी मुख्य किरदार में पेश करें ... सभी जंतर-मंतर शो के विजेताओं को सर्कस के ओपनिंग शो में छडी घुमाते हुये अवश्य दखाएं ... हमारी शुभकामनाएं ... जय हो भाऊ सर्कस की ... !!!!
(निर्मल हास्य)

Monday, June 14, 2010

...ब्लागिंग फ़र्जीबाडा है !!!

...ब्लागिंग फ़र्जीबाडा है !!!

... ब्लागवाणी भी पसंद/नापसंद ...

... चिट्ठाजगत भी हवाले-घोटाले ...

... २० पोस्ट लगागर ऊपर ... २०० पोस्ट लगाकर नीचे ...

....एक महिने में हीरो ....और एक साल वाले जीरो ...

... चिट्ठा चर्चा में भी फ़र्जीबाडा ... जिसे ऊपर भेजना है उसको सही लिंक ... जिसे नीचे ढकेलना है उसको फ़र्जी लिंक ...

... हम जिसको चाहें उसे ऊपर ले जायेंगे ... जिसे चाहें उसे पीछे ढकेल देंगें ...

... अच्छे लेखन की कोई कद्र नहीं ...

.... गुटबाजी ही असली ब्लागिंग ... बाकी सब ...

... कोई सिस्टम नहीं है ... सब मनमर्जी है ...

... अंधेर नगरी चौपट राजा है ...

.... टके शेर भाजी टके शेर खाजा है ...

.... पटका-पटकी ...

....शर्म करो ... शर्म करो ... क्या यही ब्लागिंग है ...

... हवा-हवाई है ...ब्लागिंग फ़र्जीबाडा है !!!

...चिट्ठाजगत को समझाना ... ब्लागवाणी को समझाना ... .

...भोपाल गैस कांड जैसा ही ......ब्लागिंग फ़र्जीबाडा है !!!

... कुछ ब्लागर क्यों पलायन कर गये ...

...बिना सिर पैर के पोस्ट की चर्चा ...

... अच्छे लेखन का क्रिया-कर्म ...

...तीन-चार लाईन लिखकर भी पोस्ट हिट ...

...सडैली-गरैली पोस्ट भी हिट ...

...शर्म करो ... शर्म करो ... ...ब्लागिंग फ़र्जीबाडा है !!!

...जिंदाबाद जिंदाबाद ... मुर्दाबाद मुर्दाबाद ...ब्लागिंग फ़र्जीबाडा है !!!

... नमस्ते ... नमस्ते ... नमस्ते ... अलविदा ब्लागिंग ......ब्लागिंग फ़र्जीबाडा है !!!