Thursday, April 8, 2010

भारत महान ...

हमारी जनता, हमारी सरकार
हमारा
देश, भारत महान
भ्रष्ट जनता, भ्रष्ट सरकार
भ्रष्ट देश , फिर भी भारत महान !

अब हाल देख लो, देश का हमारे
एक भ्रष्ट दूसरे भ्रष्ट को निहारता है
एक भ्रष्ट दूसरे भ्रष्ट को सराहता है
एक भ्रष्ट दूसरे भ्रष्ट को पुकारता है -
बंद करो भ्रष्टाचार
बंद करो दुराचार
बंद करो अत्याचार !

कौन सुने, किसकी सुने, क्यों सुने
कौन उठाये कदम, कौन बढाये कदम
सब तो जंजीरों से बंधे हैं
सलाखों से घिरे हैं
निकलना तो चाहते हैं सभी
तोड़ना तो चाहते हैं सभी
भ्रष्टाचारी, अत्याचारी, दुराचारी, भोगविलासी
सलाखों को - जंजीरों को !

पर क्या करें
निहार रहे हैं एक-दूसरे को
कौन रोके झूठी महत्वाकांक्षाओं को
कौन रोके झूठी आकांक्षाओं को
कौन रोके भोगाविलासिता को
कौन रोके "स्वीस बैंक" की और बढ़ते कदमों को !

कौन रोके खुद को
सब एक-दूसरे को निहारते खड़े हैं
हमारी जनता, हमारी सरकार, हमारा देश !

हर कोई सोचता है
तोड़ दूं - मरोड़ दूं
जंजीरों को - सलाखों को
रच दूं, गढ़ दूं, पुन: एक देश
जिसे सब कहें हमारा देश, भारत महान !!

9 comments:

Suman said...

nice...........................nice............................nice..............

संजय भास्कर said...

जिसे सब कहें हमारा देश, भारत महान !

संजय भास्कर said...

जिसे सब कहें हमारा देश, भारत महान !

Anil Pusadkar said...

लगता है ऐसा ही कुछ करना पडॆगा श्याम.

Amitraghat said...

सच लिखा आपने श्यामजी........."

डॉ टी एस दराल said...

हर कोई सोचता है
तोड़ दूं - मरोड़ दूं
जंजीरों को - सलाखों को

बस हर कोई सोच कर ही रह जाता है।
और हम ज़कड़े रहते हैं इस भ्रष्टाचार की जंजीरों में ।

M VERMA said...

कौन रोके "स्वीस बैंक" की और बढ़ते कदमों को
प्रश्न जायज है पर रोकना तो होगा ही
सुन्दर रचना

jamos jhalla said...

भाई जी बाहर से कोई नहीं आयेगा हमें अपने खुद के लिए ही भ्रष्टाचार की जंजीरें तोड़नी होगीं|

मनोज कुमार said...

विचारोत्तेजक!