Wednesday, April 20, 2011

... संग संग दोनों, हैं राजा-रानी !!

कविता : राजा-रानी
...
सारी रात
संग संग
जश्न में जश्न
कभी नीचे
तो कभी ऊपर
कभी आर
तो कभी पार
कभी जीते
तो कभी हारे
बाजी पे बाजी
दौर पे दौर
मौज पे मौज
जश्न में जश्न
फिर कौन शहंशाह
और कौन महारानी
संग संग दोनों, हैं राजा-रानी !!

2 comments:

परमजीत सिँह बाली said...

बहुत बढ़िया

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुंदर प्रस्तुति