Friday, May 16, 2008

चांदी के सिक्के ...

दोस्तो क्यों परेशान होते हो
क्यों हैरान होते हो
चांदी के चंद सिक्कों के लिए !

ज़रा सोचो,
चांदी के सिक्कों का करोगे क्या !
क्या इन सिक्कों को
आंखो पर रखने से नींद आ जाएगी ?
या फिर इनसे
रात की करवटें रुक जायेंगी ?

और तो और, क्या कोई बतायेगा
कि इन सिक्कों को देख कर
क्या ‘यमदूत’ डर कर लौट जायेंगे ?

या फिर, इन सिक्कों पर बैठ कर
तुम स्वर्ग चले जाओगे
या इन्हें जेब में रख कर
अजर-अमर हो जाओगे ?

अगर तुम सोचते हो
ऐसा कुछ हो सकता है
तो चांदी के सिक्के अच्छे हैं
और तुम्हारी -
इनके लिए मारामारी अच्छी है !

अगर ऐसा कुछ न हो सके
तो तुम से तो
तुम्हारे चांदी के सिक्के अच्छे हैं
तुम रहो, या न रहो
ये सिक्के तो रहेंगे
न तो तुम्हारे अपने और न ही ये सिक्के
तुम्हें कभी याद करेंगे !

अगर ऐसा हुआ या होगा !
फिर ज़रा सोचो !!

क्यों परेशान होते हो
चांदी के चंद सिक्कों के लिए !
अगर होना ही है परेशान
रहना ही है जीवन भर हलाकान्
तो उन कदमों के लिए हो !

जो कदम उठें तो
पर उठ कर कदम न रहें
बन जायें रास्ते
सदा के लिए, सदियोँ के लिये
न सिर्फ तुम्हारे लिए
न सिर्फ हमारे लिए ... !!

3 comments:

Anonymous said...

fhruti

shyam kori uday said...

jhk

संजय भास्कर said...

बहुत सुंदर और उत्तम भाव लिए हुए.... खूबसूरत रचना......

संजय कुमार
हरियाणा
http://sanjaybhaskar.blogspot.com