Tuesday, May 25, 2010

चमचागिरी !

एक दिन अचानक ... कप्तान साहब गुस्से-गुस्से में ... सरप्राईस चेक हेतु एक थाने में गुस गये और "सरप्राईस चेकिंग" करने लगे, थानेदार भौंचक्का रह गया ... सोचने लगा आज तो नौकरी गई ... फ़ाईल-पे-फ़ाईल ... पेंडिग-पे-पेंडिग ... शिकायत-पे-शिकायत ... कप्तान साहब भडकने लगे ... किसने तुझे थानेदार बना दिया ? ... क्या हाल कर रक्खा है थाने का ! ... कुछ काम नहीं करता है .... स्टेनो को आदेश देते हुये इसका सस्पेंशन आर्डर कल सुबह ११ बजे मेरी टेबल पर होना चाहिये ... गुस्से में उठने लगे ... तभी थानेदार ने सीधे पैर पकड लिये ... माफ़ करो हुजूर आपका बच्चा हूं ... आईंदा से ऎसी गल्ती नहीं होगी ... पैर छोड ही नहीं रहा था ...तब कप्तान साहब गुस्से में दूसरे पैर से एक लात उसके पिछवाडे में जडते हुये चिल्लाये छोडो पैर को ... थानेदार उचट के गिर पडा ... थानेदार संभल कर खडा हुआ ... कप्तान साहब जाने लगे और गाडी में बैठ गये ... थानेदार ने सल्यूट मार कर विदा किया !

थानेदार वापस आकर अपने चैंबर में सिर पकड कर बैठ गया सोचने लगा ... आज तो नौकरी गई ... कल सुबह सस्पेंड हो जाऊंगा ... सारे स्टाफ़ को सामने बुला कर भडकने लगा तुम लोग कुछ काम-काज करते नहीं हो, तुम्हारी बजह से आज मेरी बैंड बज गई और कल सुबह सस्पेंड होना भी तय है ... मुंह लगा एक मुंशी बोला साहब - कल सुबह सीधे कप्तान साहब के बंगले पर पहुंच जाओ, पैर पकड लेना ... साहब और मैमसाहब दोनों के ... कुछ दुखडा-सुखडा सुना देना ... थानेदार रात भर करवट बदल-बदल कर उपाय सोचने लगा ... उपाय मिल गया !

दूसरे दिन सुबह साढे-नौ बजे कप्तान साहब के बंगले पर ... साहब के पैर पडे ... मैमसाहब के पैर पडे ... और मिठाई का डिब्बा भेंट करने लगा ... कप्तान साहब गुस्से में ... क्या है ? क्यों आया है ?? ... हुजूर माई-बाप आपका आशिर्वाद लेने आया हूं ... पिछले चार-पांच साल से कमर दर्द से परेशान था ... अच्छे-से-अच्छे डाक्टर को दिखाया ... कमर ठीक ही नहीं हो रही थी ... कल आपने जो लात मारी, उससे तो "चमत्कार" ही हो गया हुजूर ... कमर का दर्द रफ़ू-चक्कर हो गया ... आपने मुझे नया जीवन दिया है ... अब मैं सारा जीवन आपकी सेवा में गुजारना चाहता हूं ... चल-चल बहुत हो गया, इस बार तो तुझे माफ़ कर देता हूं ... जा अच्छे से काम करना ... जी माई-बाप !!

26 comments:

दीपक 'मशाल' said...

बहुत ही बेहतरीन.. ये सिर्फ सोच नहीं बल्कि कईयों का सच भी है उदय जी..

Udan Tashtari said...

सटीक तरीका निकाला... :)

boletobindas said...

जैसा गुरु वैसा चेला....यही आजकल का सत्य है....जैसा कप्तान वैसा थानेदार.....

Suman said...

nice...................

M VERMA said...

वाकई चमत्कार हो गया

सूर्यकान्त गुप्ता said...

उदय भाई भक्ति मार्ग अपनाइये और वान्छित फल पाइये। भगवान तभी प्रसन्न होंगे।

honesty project democracy said...

सत्य ,न्याय और परोपकार के लिए काम करना सबसे बड़ी भक्ति है /

राजेन्द्र मीणा said...

उदय भाई ..सच ही है ये ...ऐसा कई बार देखने को मिलता है .....अच्छा और सटीक लेखन

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari said...

हा हा हा.

रश्मि प्रभा... said...

badhiyaa

दिलीप said...

sateek aur sachchi baat...

sangeeta swarup said...

बहुत बढ़िया कटाक्ष...

बी एस पाबला said...

आजकल का रिवाज!

राज भाटिय़ा said...

चमचा तो चमक ऊठा जी यह आज का सच है

arvind said...

आपने जो लात मारी, उससे तो "चमत्कार" ही हो गया हुजूर कमर का दर्द रफ़ू-चक्कर हो गया ... आपने मुझे नया जीवन दिया है .....आज का सच .बहुत ही बेहतरीन

डॉ टी एस दराल said...

यह तरीका तो हमारे भी काम का है ।
लेकिन इस्तेमाल कैसे करें ।

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

मजाक मजाक में बहुत काम का गुर सिखा गए :-)

जी.के. अवधिया said...

:) :) :)

ajay saxena said...

जितने थानेदार पहचान के हैं सबको ये किस्सा सुनाउंगा..शायद इन ठलुओं के काम आ जाए...हा..हा.हा हा

kshama said...

Munshi Premchand ki yaad aa gayi..aisi vidambana us kaaleen lekhan me bahut dikhti hai..!
Bahuthi sundar !

Arvind Mishra said...

great! ha ha ha

मनोज कुमार said...

रोचक प्रस्तुति!

Kumar Jaljala said...

ैक्या आप जानते है.
कौन सा ऐसा ब्लागर है जो इन दिनों हर ब्लाग पर जाकर बिन मांगी सलाह बांटने का काम कर रहा है।
नहीं जानते न... चलिए मैं थोड़ा क्लू देता हूं. यह ब्लागर हार्लिक्स पीकर होनस्टी तरीके से ही प्रोजक्ट बनाऊंगा बोलता है। हमें यह करना चाहिए.. हमें यह नहीं करना चाहिए.. हम समाज को आगे कैसे ले जाएं.. आप लोगों का प्रयास सार्थक है.. आपकी सोच सकारात्मक है.. क्या आपको नहीं लगता है कि आप लोग ब्लागिंग करने नहीं बल्कि प्रवचन सुनने के लिए ही इस दुनिया में आएं है. ज्यादा नहीं लिखूंगा.. नहीं तो आप लोग बोलोगे कि जलजला पानी का बुलबुला है. पिलपिला है. लाल टी शर्ट है.. काली कार है.. जलजला सामने आओ.. हम लोग शरीफ लोग है जो लोग बगैर नाम के हमसे बात करते हैं हम उनका जवाब नहीं देते. अरे जलजला तो सामने आ ही जाएगा पहले आप लोग अपने भीतर बैठे हुए जलजले से तो मुक्ति पा लो भाइयों....
बुरा मानकर पोस्ट मत लिखने लग जाना. क्या है कि आजकल हर दूसरी पोस्ट में जलजला का जिक्र जरूर रहता है. जरा सोचिए आप लोगों ने जलजला पर कितना वक्त जाया किया है.

दिगम्बर नासवा said...

आज का काड़ुवा सच ... आपने ब्लॉग सार्थक किया ..

Poorviya said...

bahut sahi kaha uday ji.hazari bajani bahut jaruri hai aaj kal tabhi naukari bachati hai.

Patwari Jee said...

Know more @ www.freeastroaid.com Patwari Jee Jee says," To see a lucky thing/animal while starting a new work can change the results. It depends upon the circumstances or environment to get a chance to see a lucky thing/animal at that time."