Tuesday, September 14, 2010

कामनवेल्थ गेम्स ... देह व्यापार सामाजिक बुराई या सामाजिक जरुरत ???

"देह व्यापार" बहुत सुना हुआ, जाना हुआ, समझा हुआ सा शब्द है, हो भी क्यों ... आखिर देह, तन, काया की माया ही अपरंपार है साथ में व्यापार शब्द भी जुडा है ... माया तो फिर माया है फिर देह की ही क्यों हो, प्रश्न माया या माया नगरी का नहीं है यह सम्पूर्ण जगत ही "माया नगरी" है

चलिए अब मुद्दे पे जाते हैं मुद्दा "देह व्यापार" का नहीं है, मुद्दा है "कामनवेल्थ गेम्स" का ... कामनवेल्थ गेम्स एक अंतर्राष्ट्रीय आयोजन है जिसमें सिर्फ खिलाड़ी, कोच, मैनेजमेंट, मीडिया के लोग देश-विदेश से आयेंगे वरन दर्शकों का विशाल समूह, झुण्ड, ग्रुप भी आयेगा ... लाखों लोगों का आना-जाना बना रहेगा

कामनवेल्थ गेम्स आयोजन के दौरान बड़े पैमाने पर देह व्यापार होने की शंका जाहिर की जा रही है, देश-विदेश से देह व्यापार से जुड़े लोगों खासतौर पर काल गर्ल्स, दलाल, को-आर्डीनेटर, मैनेजर, प्रोटेक्टर, इत्यादि लोगों का जमावड़ा लगना लगभग तय है ...

... ये तो कुछ भी नहीं, देह व्यापार का भरपूर आनंद उठाने वाले लोग, ग्राहक, शौक़ीन, दर्शक, खिलाड़ी, अनाडी, व्यापारी, टूरिस्ट इत्यादि तो अभी से देह व्यापार से जुड़े लोगों की अपेक्षा ज्यादा उत्सुक जिज्ञासु हो रहे होंगे ... खैर होना लाजिमी भी है आखिर भरपूर आनंद तो उन्हें ही उठाना है

देह व्यापार का विरोध भी आवश्यक है और इस कार्य के लिए हिन्दुस्तानी मीडिया पर्याप्त है, सिर्फ टेलीविजन न्यूज चैनल्स पर वरन प्रिंट मीडिया में भी विरोध की लौ फड-फडाने लगी है ... जायज भी है, पर विरोध कितना जायज है यह सवाल जरुर उठता है ...

... अब सवाल उठने-उठाने की बात गई है तो इस पर चर्चा भी आवश्यक है, चर्चा इसलिए कि विरोध करना अपने देश में एक फैशन-सा बन गया है, क्या सही है - क्या गलत है यह तो बहुत दूर का विषय है ... खैर चलो सही-गलत को भी छोड़ देते हैं ...

... असल चर्चा पर जाते हैं जिस आयोजन में लाखों लोगों का आना-जाना बना रहेगा ... सभी लोग हर क्षण मौज-मस्ती, खाने-पीने, मांस-मदिरा का भरपूर लुत्फ़ उठाने में मस्त व्यस्त रहेंगे तो स्वाभाविक है लोग डगमगायेंगे ...

... डगमगायेंगे तो निश्चित ही छेड़छाड़, छींटाकशी, किडनेपिंग, रेप की घटनाएं घटित होंगी, जब ये घटनाएं होंगी तब अपना देश कितना शर्मसार होगा ? ... देह व्यापार जो होगा वह उतना शर्मसार नहीं करेगा जितना ये घटनाएं शर्मसार करेंगी !!!

... क्या हम भूल रहे हैं कि अन्य देशों में इस तरह के विशाल आयोजन के समय देह व्यापार से जुड़े लोगों को विशेष सुविधाएं प्रदान की जाती हैं !!!... क्यों, किसलिए ... शायद इसलिए कि छेड़छाड़, किडनेपिंग, रेप जैसी आपराधिक घटनाओं की बजह से शर्मसार होना पड़े !!!

... खैर समस्याएँ तो हैं और बनी रहेंगी, देह व्यापार सदियों से चलते रहा है संभव है आगे भी चलता रहे ... मेरा मानना तो यह है कि कभी-कभी देह व्यापार समस्या के रूप में नजर आकर समाधान के रूप में नजर आता है ... एक ज्वलंत प्रश्न छोड़ रहा हूँ ... देह व्यापार सामाजिक बुराई है या सामाजिक जरुरत ???

4 comments:

Akhtar Khan Akela said...

uday bhaayi komn velth gem hen isme sb kuch komn he bhrstaachar komn, fizulkhrchi komn or deh vyaapaar komn lekin pne dil ki ghraayi ko chune vali bat likhi he bdhaayi ho . akhtar khan akela kota rajsthan

राजभाषा हिंदी said...

नई जानकारी। राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।

काव्य प्रयोजन (भाग-८) कला जीवन के लिए, राजभाषा हिन्दी पर मनोज कुमार की प्रस्तुति, पधारें

arvind said...

achhi post...mujhe lagta hai deh vyaapar aaj ke samaaj ki jarurat hai...

Suman said...

इसलिए कि छेड़छाड़, किडनेपिंग, रेप जैसी आपराधिक घटनाओं की बजह से शर्मसार न होना पड़े .nice