Wednesday, December 8, 2010

जीवनचक्र

नंगे आये थे
सब यहाँ छोड़
नंगे चले जाना है !
............

है
खबर सबको
दौलतें छूट जायेंगी
लालच में डूबे हुए हैं !
............

गरीब
भूखा है
रोटी मिलेगी
दुआ जरुर देगा !

............

समेटेंगे
छिपा रहेगा
बांटेंगे काम आयेगा
मन को खुशियाँ मिलेंगी !
............

मेहनत
की रोटी
पेट भर देती है
नींद जाती है !
............

मजहबी
बातें
दीवारें बन रही हैं
और इंसान खौफजदा !
............

रियासतें
- सियासतें
कोठियां और महल
खंडहर हो गए हैं !
............

लड़ाई
भी चलेगी
और चलते रहेगी
हम इंसान जो हैं !
............

थे
जानवर पहले
लड़ना, घूरना, गुर्राना
कैसे भूल जाएँ !
............

नक़्शे
, सरहदें देश
सब ज्यों के त्यों रहेंगे
बस इंसान गुजरते रहेंगे !!!

22 comments:

अरविन्द जांगिड said...

उदय जी,

पहले तो मैं बता दू कि आपने "सच्चाई" लिखी है.

प्रत्येक पंक्ति सार्थक एंव सटीक है, सुन्दर रचना.

एक पंक्ति है-
"कभी इससे कभी उससे,
दिल का क्या है,
दिल तो टूटता आया है,

कभी इस पर कभी उस बात पर,
आदमी का क्या है,
आदमी तो बिकता आया है"

आपका आत्मीय धन्यवाद.

केवल राम said...

आदरणीय उदय जी
मेहनत की रोटी
पेट भर देती है
नींद आ जाती है !
आपकी कविता वर्तमान हालत और जीवन की सच्चाईयों का मिलाजुला लेखा -जोखा प्रस्तुत करती है ...शुभकामनायें

Kunwar Kusumesh said...

वाह वाह क्या बात है आपके लेखन में

संजय भास्कर said...

I AGREE WITH KEWAL RAM

संजय भास्कर said...

कमाल की लेखनी है आपकी लेखनी को नमन बधाई

परमजीत सिँह बाली said...

बढ़िया पोस्ट।

kshama said...

Bahut sundar....! Aakharee panktiyan to kamaal kee hain!

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

हर हाईकू ...प्रभावशाली ....

ज़िंदगी का सच उजागर करती ...

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " said...

har 'teen lina' bade kam ki baat kahti hai.
sooktiyan lagti hain...

वाणी गीत said...

सबसे पहले आपने सच्चाई लिखी और जान कर भी नासमझ बने इंसानों की दास्ताँ ...!

प्रवीण पाण्डेय said...

जीवन और समाज का सच उकेर दिया है आपने।

वन्दना said...

सत्य को उजागर करती सुन्दर रचना।

arvind said...

sacchhai...haqeeqt bayaan karati sundar rachna.

डॉ टी एस दराल said...

सही बातें लिखी हैं । एक अलग अंदाज़ ।

मो सम कौन ? said...

बहुत खूब उदय जी, नया अंदाज लगा आज आपका और बहुत अच्छा लगा।

हरकीरत ' हीर' said...

हाइकू के काफी नज़दीक ....

सभी गहन अर्थ लिए हुए ...

ZEAL said...

यथार्थ दर्शन कराती सुन्दर रचना।

Poorviya said...

jindagi ki sacchai se rubaru.

मनोज कुमार said...

यह तो यथार्थ के ज़्यादा क़रीब है।

राज भाटिय़ा said...

सत्य लिखा हे जी आप ने, बहुत खुब, धन्यवाद

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

Hakikat likh dali hai..... prabhavi ban padi hai rachna .....

अनुपमा पाठक said...

yatharthparak rachna !