Thursday, June 10, 2010

जीवन पथ ...

जीवन के छोटे से पथ पर
कदमों के छोटे से रथ पर
बढते हैं हम जीवन पथ पर
पग-पग रखकर बढते हैं हम
ऊंचे-नीचे जीवन पथ पर

मिलते हैं कुछ ऎसे पत्थर
देते हैं जो हमको टक्कर
खाते ठोकर - देते ठोकर
टक्कर देते बढते हैं हम
जीवन के छोटे से पथ पर

फ़िर मिलतीं कुछ पगडंडी हैं
पगडंडी पर मिलते कंकड
चुभते हैं पैरों को कंकड
छूट चले फ़िर पीछे कंकड
जीवन के छोटे से पथ पर

बढते बढते जीवन पथ पर
फ़िर मिलते मिट्टी के ढेले
ढेले भी कुछ अजब निराले
चुभते चुभते देते राहत
जीवन के छोटे से पथ पर

चलते चलते पहुंच रहे हैं
हम जीवन के सुन्दर पथ पर
इस पथ पर बिखरे हैं फ़ूल
मिले सुकूं सब को इस पथ पर
जीवन पथ पर ... जीवन पथ पर।

15 comments:

योगेश शर्मा said...

sundar...chaliye manzilein makaam tak pahunch hee gaye fir

दिलीप said...

waah sirji bahut sundar kavita...

kunwarji's said...

khoobsurat path-darshan...

kunwar ji,

संगीता पुरी said...

वाह .. बहुत सुंदर !!

राजकुमार सोनी said...

जीवन का यह पथ अग्निपथ से कम नहीं। बहुत ही शानदार विचार।

Udan Tashtari said...

वाह!! आनन्द आ गया.

महफूज़ अली said...

आपकी यह पोस्ट बहुत अच्छी लगी....

सूर्यकान्त गुप्ता said...

क्या बात है? यह डगर ही कठिन है जिस पर चल लिया जाता है सहजता से।

pawan dhiman said...

चलते चलते पहुंच रहे हैं..हम जीवन के सुन्दर पथ पर..बढ़िया रचना

Mishra Pankaj said...

:)

ललित शर्मा said...

बढिया रचना
आभार

नामकरण की शुभकामनाएं

आपकी चर्चा यहां भी है

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

सुन्दर रचना....जीवन का पथ ऐसे ही प्रशस्त रहे

संजय भास्कर said...

Acharya ji parnaam..

आपकी यह पोस्ट बहुत अच्छी लगी...

Vinay Prajapati 'Nazar' said...

सुन्दर रचना है

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गुलाबी कोंपलें
The Vinay Prajapati

दिगम्बर नासवा said...

आशा का संचार करती रचना ... प्रेरणा देती है बहुत ...