Monday, March 28, 2011

सच ! तू मेरी गौरैया है !!

चिड़ियों की चह-चहाहट सुन
मन मेरा, चंचल हो जाता है
जब जब देखूं, मैं तुझको
मुझको चिड़ियों सी, तू लगती है
चूँ-चूँ करतीं चिड़ियाँ जैसे
वैसे ही, तेरी बातें भी, मुझको
मीठी-मीठी, चूँ-चूँ सी लगती हैं
कब तू आती, पास मेरे
और कब फुर्र-फुर्र उड़ जाती है
नाजुक, कोमल, भावन, प्यारी
सच ! तू मेरी गौरैया है !!
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सच ! जब जब देखा मैंने गौरैया को, तुम मुझको याद आईं
और जब जब देखा तुमको मैंने, तुम गौरैया सी मन को भाईँ !
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5 comments:

सारा सच said...

nice

Patali-The-Village said...

बहुत सुन्दर गौरैया जैसी कविता | धन्यवाद|

bilaspur property market said...

मीठी-मीठी सी कविता
आप की तो कविता शानदार लगती है

manish jaiswal

संजय भास्कर said...

वाह!!!वाह!!! क्या कहने, बेहद उम्दा

संजय भास्कर said...

..........दिल को छू लेने वाली प्रस्तुती