Monday, October 18, 2010

शाबास इंडिया ... रहमान को अब भी नाज है थीम सांग पर !


कामनवेल्थ गेम्स थीम सांग को लेकर जो छी-छा लेदर, टीका-टिप्पणी हुई थी कोई बे-वजह नहीं हुई थी यह सच है कि थीम सांग उच्चस्तरीय प्रसंशनीय नहीं था, इस बात की स्वीकारोक्ति स्वयं गीतकार आस्कर अवार्ड विजेता .आर.रहमान ने कर ली है किन्तु उनका यह भी कहना कि उन्होंने " ... सर्वश्रेष्ठ करने की कोशिश की थी फिर भी मैं अपेक्षाओं के अनुरूप खरा नहीं उतरा, मगर मुझे अपने गीत धुन पर नाज है ... " नाज करो, आपका हक़ है नाज करना, आखिर जग-हसाई करवाने के बदले में साढ़े-पांच करोड़ रुपये जो मिले हैं अगर कोई महाशय इतनी बड़ी रकम हजम करने के बाद भी "नाज" करे तो जरुर चिंता का विषय होगा !

देश के आमजन, आयोजन समीति, खेलप्रेमी खेल के जानकार .आर.रहमान के गीत "इंडिया बुला लिया" की तुलना फुटबाल विश्वकप के गीत "वाका-वाका" से कर रहे थे जो लाजिमी नहीं था ! क्योंकि किसी एक गीत की तुलना किसी दूसरे गीत से करना न्यायसंगत नहीं होगा, पर यह भी आवश्यक है कि हर किसी फरफार्मेंस का अपना अपना महत्त्व होता है जो स्पष्ट है कि .आर.रहमान अपने थीम सांग पर विशाल आयोजन खेल भावनाओं के अनुरूप खरे नहीं उतरे ! अब जो हो गया सो हो गया, जो गुजर गया तो गुजर गया, अब इस विषय पर बहस का कोई औचित्य भी नहीं है और होना भी नहीं चाहिए ! पर हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि इस तरह के अंतर्राष्ट्रीय आयोजन के अवसरों पर इस तरह का साधारण रबैय्या देश को शर्मसार ही करता है, खैर जाने देते हैं !

किन्तु मेरा मानना तो यह है कि जिस प्रकार अब भी .आर.रहमान अपने गीत धुन पर नाज कर रहे हैं वह उचित नहीं है, ये तो वही बात हुई कि देश का हर दूसरा-तीसरा आदमी बाथरूम में गीत गुनगुना कर खुद पर नाज कर लेता है ! सच्चाई तो आखिर सच्चाई ही रहेगी ... रहमान जी खुद पर नाज करने से कुछ नहीं होगा ... अगर कुछ करना ही है तो उन सभी खिलाड़ियों पर नाज करो जिन्होंने "मेडल-पर-मेडल" जीत कर देश को गौरवान्वित किया है ! ... जो साढ़े-पांच करोड़ आपको मिले हैं यदि उस रकम में से आप इमानदारी से अपनी मेहनत का हिस्सा रखकर शेष रकम को मेडल जीतने वाले खिलाडियों के मान-सम्मान पर खर्च कर दें तो शायद आपकी भी जय जय कार हो जाए !

12 comments:

Apanatva said...

kya kahe...........

niruttar hai.......

प्रवीण पाण्डेय said...

असली धुन तो मेडल जीतने वालों ने स्थापित की है।

महेन्द्र मिश्र said...

कामनवेल्थ गेम्स थीम सांग पर नहीं बल्कि जो उन्हें माल मिला है उसे याद कर वे उसपर नाज कर रहे हैं .... हा हा हा हा

RAJENDRA said...

श्यामजी मुझे बहस में तो नहीं पड़ना है पर अच्छी चीजों पर सबका बराबर हक होता है जेसे हवा
पानी वेसे ही संगीत पर भी रहमान भले ही इतरावे नाज़ करें पर आम लोगों का तो जायका खराब ही कर के रख दिया बच्चे सड़क छाप गानों को सुर में गाते हैं तो हमें उस पर भी नाज़ होता है रहमान के गाने पर कतई नहीं

राम त्यागी said...

koi apani galti maanata hai kya ?

मनोज कुमार said...

कुछ करना ही है तो उन सभी खिलाड़ियों पर नाज करो जिन्होंने "मेडल-पर-मेडल" जीत कर देश को गौरवान्वित किया है ! ... जो साढ़े-पांच करोड़ आपको मिले हैं यदि उस रकम में से आप इमानदारी से अपनी मेहनत का हिस्सा रखकर शेष रकम को मेडल जीतने वाले खिलाडियों के मान-सम्मान पर खर्च कर दें तो शायद आपकी भी जय जय कार हो जाए !
आपकी ये राय मेरी भी टिप्पणी माना जाए। आपसे पूरी तरह सहमत। हमें नाज़ है अपने खिलाड़ियों पर, जो सुविधाओं और अत्याधुनिक तकनीकों के अभाव में भी बेहतरीन प्रदर्शन कर गए।

डॉ टी एस दराल said...

साढ़े पांच करोड़ गए पानी में । फिर किस बात पर नाज़ है ?

राज भाटिय़ा said...

साढ़े-पांच करोड़? अब पता नही इस मे भी कितना घटोला हुआ, ओर कितने इस इडियां बुलाने वाले को मिले? यह तो रहमान ही जाने, जब कि रहमान को मुफ़त मे यह धुन बनानी चाहिये थी?

पंकज मिश्रा said...

उदय जी, आपकी बात मैं इत्तेफाक रखता हूं। लेकिन मैं रहमान साहब का आज से नहीं जब रंगीला आई थी तभी से फैन हूं। रहमान के चेहरे पर ईमानदारी दिखती है। उन्होंने पूरी मेहनत से धुन बनाई थी लेकिन जरूरी नहीं कि वह पसंद आ ही जाए। रहमान ने बहुत सारे गाने बनाए जो मुझे पसंद हैं हो सकता है वह आपको पसंद न हों। धुन बहुत शानदार नहीं थी, यह सही है और रहमान ने इसे स्वीकार भी कर लिया है, लेकिन उनकी ईमानदारी पर कृपा कर अंगुली न उठाएं।

अशोक बजाज said...

बहुत उत्तम जानकारी के लिए आभार .

ZEAL said...

अगर कुछ करना ही है तो उन सभी खिलाड़ियों पर नाज करो जिन्होंने "मेडल-पर-मेडल" जीत कर देश को गौरवान्वित किया है ! ..

sahi kaha aapne.

Rajput said...

wo gana(Song) tha kiya ?