Thursday, July 7, 2011

टुडेज लव : डोंट वरी, मिलते रहेंगे !!

प्रिया - राज तुम मुझे माफ़ कर दो, मैं तुम से शादी नहीं कर सकती !
राज - ऐसा क्या हुआ, मुझसे क्या गलती हो गई, जो तुम अचानक ही ... मैं जानता हूँ तुम मुझे उतना ही प्यार करती हो जितना मैं तुम्हें चाहता हूँ !
प्रिया - बेहतर होगा, तुम मुझे भूल जाओ ... सिर्फ मुझे ही नहीं, मेरे प्यार को भी ... मैं आज के बाद ... शायद तुम से न मिलूं, प्यार तो बहुत दूर की बात है, प्लीज !
राज - ... प्रिया ... प्लीज ... मैं तुम्हें, अपनी जान से भी ज्यादा प्यार करता हूँ, तुम्हारे बगैर ... शायद जी न सकूं ... प्लीज, ऐसा मत कहो, आखिर तुम भी तो मुझे बे-इन्तेहा चाहती रही हो ... तुम मुझे कैसे भूल सकती हो !
प्रिया - सुनो राज, अब इन बातों का कोई मतलब नहीं है, बेहतर होगा तुम मुझे भूल ही जाओ ... और तुम अपने कैरियर के लिए तैयारी करो ... मैं अब तुमसे प्यार नहीं करती ... और शायद आज ये मेरी तुमसे आख़िरी मुलाक़ात है ... अब मैं जा रही हूँ ... प्लीज !
राज - तुम मुझे ऐसे छोड़कर नहीं जा सकती ... हमारा तीन साल का प्यार, एक पल में कैसे ख़त्म हो सकता है ... तुम्हें मुझे बजह बतानी ही पड़ेगी, मैं तुम्हें ऐसे जाने नहीं दूंगा !
प्रिया - प्लीज राज, तुम मुझे भूल जाओ, मेरे घर वाले शादी के लिए जिद कर रहे हैं ... और तुम जानते हो कि मैं तुम से शादी नहीं कर सकती, मैं सुनील से अगले हफ्ते शादी कर रही हूँ ... तुम जानते हो सुनील को !
राज - उस सुनील से ... करोड़पति बाप की बिगड़ी औलाद से ... तुम्हारा उससे कई बार झगड़ा भी हो चुका है और तुम उसे पसंद भी नहीं करती हो ... उसका चाल-चलन कितना खराब है ... और वो तुम्हें प्यार भी नहीं दे सकता, न जाने कितनी लड़कियों के सांथ फ्लर्ट ... !
प्रिया - सुनो राज ... प्लीज ... मुझे माफ़ कर दो ... मुझे भूल जाओ ... ( लगभग ५-७ मिनट के सन्नाटे के बाद प्रिया अपने हाँथ को राज से छुडाते हुए ) ... राज सिर्फ प्यार ही काफी नहीं होता जीने के लिए ... प्लीज ... टेक केयर ... ओके बाय ... ( चलते चलते प्रिया राज को देखते हुए हाँथ उठाकर बाय करते हुए अपनी बांई आँख मारते हुए बोली ) ... डोंट वरी, मिलते रहेंगे !!

3 comments:

शहरोज़ said...

आपको पढना हमेशा अच्छा लगा है.

सार्थक.जभी तो कहा जाता है इस ब्लॉग कि पोस्ट को. आपको पढना हमेशा अच्छा लगा है.
समय हो तो युवतर कवयित्री संध्या की कवितायें. हमज़बान पर पढ़ें.अपनी राय देकर रचनाकार का उत्साह बढ़ाना हरगिज़ न भूलें.
http://hamzabaan.blogspot.com/2011/07/blog-post_06.html

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

आज कल यह सब भी व्यवहारिक हो गया है ..मिलते रहने के लिए शादी ज़रुरी नहीं ..

प्रवीण पाण्डेय said...

सन्नाट।