Monday, June 27, 2011

युवाशक्ति !

नहीं मशालें, इन हांथों में
ये खुद ही चिंगारी हैं
सोने की लंका हो चाहे
या फिर महल हों लोहे के
जल जाएंगे, मिट जाएंगे
हो जाएंगे ख़ाक सभी !

देखो, संभलो, मान भी जाओ
भ्रष्टाचार को भूल भी जाओ
कालाधन वापस ले आओ
गर नहीं हुआ, ऐसा तुमसे तो
फिर संग्राम तो होना है !

आज खड़े हैं, संग अन्ना के
सत्य-अहिंसा के पथ पर
गर, कल बन बैठे युवा देश के
आजाद, भगत, सुखदेव, बोस
फिर महासंग्राम भी होना !

आज समय है जाग भी जाओ
भ्रष्टाचारी कुम्भकर्णों
भूल जाओ, तुम भस्मासुर -
और रावण जैसे ख्यालों को
आज समय है, आज घड़ी है
सामने सच्ची राह पडी है !

गर पकड़ी, आज भी तुमने
वही सब, फिर होना है
जो हुआ था रावणराज का
और सोने की लंका का !

जाग भी जाओ, मान भी जाओ
आज, तुम्हें, नहीं कुछ खोना है
बस, भ्रष्टाचार मिटाना है
बस, भ्रष्टाचार मिटाना है !!

7 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

बस यही स्वर हर हृदय में गुंजित हो।

कमलेश भगवती प्रसाद वर्मा said...
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कमलेश भगवती प्रसाद वर्मा said...
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कमलेश भगवती प्रसाद वर्मा said...
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कमलेश भगवती प्रसाद वर्मा said...
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Kailash C Sharma said...

आज यही जन जन की आवाज़ है..बहुत सुन्दर समसामयिक और प्रेरक प्रस्तुति..

Akhilesh Jha said...

बहुत बढ़िया एक प्रेरणादायक कविता