Sunday, October 3, 2010

हमारा छत्तीसगढ़, सुनहरा छत्तीसगढ़ !

जय जय ... जय जय छत्तीसगढ़
हमारा छत्तीसगढ़, सुनहरा छत्तीसगढ़ !

हम हैं ... हम हैं
छत्तीसगढ़ी हम हैं

बढे हैं हम, बढ़ रहे हैं
छत्तीसगढ़ को गढ़ रहे हैं

चलो-चलें ... हम सब छत्तीसगढ़
रचें-बसें ... हम सब छत्तीसगढ़

माटी संग, महतारी संग
खेतों संग, खलिहानों संग

गाँव-किसान, संगवारी-मितान
संग संग चल, बढ़ता चल

चल छत्तीसगढ़, बढ़ छत्तीसगढ़
आसमान ... छू ले छत्तीसगढ़ !

हम हैं ... हम हैं
छत्तीसगढ़ी हम हैं

हरियाली ... खुशहाली है
खिल-खिल बहती नदियाँ हैं

कदम-कदम, डगर-डगर
शान अलग ... पहचान अलग है

समभाव ... सर्व-धर्म है
भाईचारा और अपनापन है

महानदी पावन पवित्र है
अर्धकुंभ ... ही महाकुंभ है

चल छत्तीसगढ़, बढ़ छत्तीसगढ़
आसमान ... छू ले छत्तीसगढ़ !!

जय जय ... जय जय छत्तीसगढ़
हमारा छत्तीसगढ़, सुनहरा छत्तीसगढ़ !!

19 comments:

arvind said...

चल छत्तीसगढ़, बढ़ छत्तीसगढ़
आसमान ... छू ले छत्तीसगढ़ !

....jay johar.

arvind said...

चल छत्तीसगढ़, बढ़ छत्तीसगढ़
आसमान ... छू ले छत्तीसगढ़ !

....jay johar.

प्रवीण पाण्डेय said...

जयति जय जय, छत्तीसगढ़।

दिगम्बर नासवा said...

आसमान ... छू ले छत्तीसगढ़ ...

आमीन ... सभी प्रदेश आसमान छूने लगें तो लिटना अच्छा हो ...

Rahul Singh said...

प्रासंगिक विषय, बधाई.

S.M.HABIB said...

छत्तीसगढ़ आघू बढ़
नवा वर्तमान
अउ भविष्य गढ़.

ZEAL said...

चल छत्तीसगढ़, बढ़ छत्तीसगढ़
आसमान ... छू ले छत्तीसगढ़ !!


vaah !

.

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति। धन्यवाद

mahendra verma said...

क़दम क़दम डगर डगर,
शान अलग पहचान अलग है।

बहुत अच्छा प्रेरणा गीत।
शुभकामनाएं...।

Udan Tashtari said...

जय जय छत्तीसगढ़

Shah Nawaz said...

चल छत्तीसगढ़, बढ़ छत्तीसगढ़
आसमान ... छू ले छत्तीसगढ़ !!

बहुत बढ़िया!.... जय जय छत्तीसगढ़

sidheshwer said...

* छत्तीसगढ़िया!
सबले बढ़िया!!

Sanjeet Tripathi said...

निस्संदेह आपकी कविता अच्छी , न केवल अच्छी बल्कि आज के छत्तीसगढ़ को सुपरिभाषित करती हुई हैं .
संत कवि पवन दीवान की कविताओं की याद आ गई, मोर छत्तीसगढ़ माटी चन्दन ...

JHAROKHA said...

समभाव ... सर्व-धर्म है
भाईचारा और अपनापन है

महानदी पावन पवित्र है
अर्धकुंभ ... ही महाकुंभ है

चल छत्तीसगढ़, बढ़ छत्तीसगढ़
आसमान ... छू ले छत्तीसगढ़
bahut hi prabhav-shali avamkhoob -suratrachna !

girish pankaj said...

koshish achchhi hai. kash yah geet chhand-baddha bhi ho jata. khair, bhavishy mey saja-sanvaraa geet bhi aayegaa. is prayas k liye dil se badhai. abhi to ye angadaai hai. aage aur charhaai hai.

shikha varshney said...

बढ़िया गीत .

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari said...

श्‍याम भाई आधुनिक संदर्भों में एवं वर्तमान संगीत परम्‍पराओं के अनुसार यह थीम सांग के लिये सर्वथा उपयुक्‍त है, भेजिये इसे डॉ.रमन के दरबार में क्‍योंकि वे जिससे छत्‍तीसगढ़ का थीम सांग गवाना चाह रहे हैं वह इस सांग को बेहतर प्रस्‍तुत कर सकेगा बनिस्‍बत आचार्य नरेन्‍द्र देव के गीत के.

आभार.

खबरों की दुनियाँ , भाग्योत्कर्ष said...

प्रासंगिक एवम अच्छी पोस्ट , शुभकामनाएं । पढ़िए "खबरों की दुनियाँ"

Dageshwar Prasad Sahu said...

जय जय छत्तीसगढ़
हमारा छत्तीसगढ़, सुनहरा छत्तीसगढ़ !