Thursday, December 24, 2009

नव वर्ष अभिनंदन

नव वर्ष के अभिनंदन में,
हम-तुम मिल कर वचन करें,
कदम से कदम मिला कर ही,
हम-तुम मिल कर कदम चलें,

न हों बातें तेरी-मेरी,
न हो बंधन जात-धर्म का,
न हो रस्में ऊंच-नीच की,
न हो बंधन सरहदों का,
न हो भेद नर और नारी में,

हो तो बस एक खुला बसेरा,
बिखरी हो फूलों की खुशबू,
रंग-रौशनी छाई हो,

बाहों में बाहें सजती हों,
कंधों संग कंधे चलते हों,
नर और नारी संग बढते हों,
जन्मों में खुशियां खिलती हों,

धर्म बना हो राष्ट्रमान,
कर्म बना हो समभाव,
नव वर्ष का अभिनंदन हो,
धर्म-कर्म का न बंधन हो,

खुशियां-खुशबू, रंग-रौशनी बिखरी हो,
गांव-गांव, शहर-शहर,
हर दिल - हर आंगन में,
नव वर्ष के अभिनंदन में,

मान बढा दें, शान बढा दें
चेहरे-चेहरे पे मुस्कान खिला दें,
हम-तुम मिलकर
वचन करें - कदम चलें,
नव वर्ष के अभिनंदन में ।

28 comments:

संजय भास्कर said...

बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
ढेर सारी शुभकामनायें.

संजय कुमार
हरियाणा
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

संजय भास्कर said...

प्रिय ब्लॉगर बंधू,
नमस्कार!

आदत मुस्कुराने की तरफ़ से
से आपको एवं आपके परिवार को क्रिसमस की हार्दिक शुभकामनाएँ!

Sanjay Bhaskar
Blog link :-
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

राज भाटिय़ा said...

न हों बातें तेरी-मेरी,
न हो बंधन जात-धर्म का,
न हो रस्में ऊंच-नीच की,
न हो बंधन सरहदों का,
न हो भेद नर और नारी में,
बहुत सुंदर रचना धन्यवाद

योगेश स्वप्न said...

kash main tathastu kah sakta, chalo, aameen hi kah deta hun.

मनोज कुमार said...

आपको नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं।

ललित शर्मा said...

बाहों में बाहें सजती हों,
कंधों संग कंधे चलते हों,
नर और नारी संग बढते हों,
जन्मों में खुशियां खिलती हों,

मान बढा दें, शान बढा दें
चेहरे-चेहरे पे मुस्कान खिला दें,
हम-तुम मिलकर
वचन करें - कदम चलें,
नव वर्ष के अभिनंदन में ।

बने केहे हस श्याम भाई, आपो ला नवा बछर के गाड़ा-गाड़ा बधई।

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

सुन्दर विचार! आपको भी नूतन वर्ष मंगलमय हो!

निर्मला कपिला said...

न हों बातें तेरी-मेरी,
न हो बंधन जात-धर्म का,
न हो रस्में ऊंच-नीच की,
न हो बंधन सरहदों का,
न हो भेद नर और नारी में,

हो तो बस एक खुला बसेरा,
बिखरी हो भूलों की खुशबू,
रंग-रौशनी छाई हो,
बहुत सुन्दर और सही बात कही है।ागर हम सब ऐसे सोचने लगें तो दुनिया स्वर्ग बन जाये। नववर्ष की आपको भी शुभकामनायें। कविता बहुत ही अच्छी लगी ।धन्यवाद ।

दिगम्बर नासवा said...

न हों बातें तेरी-मेरी,
न हो बंधन जात-धर्म का,
न हो रस्में ऊंच-नीच की,
न हो बंधन सरहदों का,
न हो भेद नर और नारी में ......

आमीन ....... सुंदर अभिनंदन है नव वर्ष का ..... लाजवाब रचना है ........

बुझो तो जानें said...

AAchi Rachna.Naw varsha ki Shubhkamnay.

शमीम said...

Bahut Sundar Prastuti.shubhkamnay.

Devendra said...

नववर्ष मंगलमय हो।

हरकीरत ' हीर' said...

सुंदर......!!

नववर्ष की शुभकामनाएं ......!!

विनोद कुमार पांडेय said...

खुशियां-खुशबू, रंग-रौशनी बिखरी हो,
गांव-गांव, शहर-शहर,
हर दिल - हर आंगन में,
नव वर्ष के अभिनंदन में,

आपको भी नववर्ष की हार्दिक बधाई!!

Rekhaa Prahalad said...

आभार जो आप मेरे ब्लॉग पर आये और एक सुन्दर सी टिपण्णी दी. आपकी यह कविता आपके विचारो कि सुन्दर अभिव्यक्ति है. आपको नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं

psingh said...

बहुत ही सुन्दर रचना
बहुत -२ बधाई

अल्पना वर्मा said...

'चेहरे-चेहरे पे मुस्कान खिला दें'

बहुत ही सुंदर विचार हैं.

सुंदर सरल शब्दों में बँधी प्रभावी कविता अपने संदेश को भली भाँति व्यक्त कर रही है.
ईश्वर करे नव वर्ष ऐसा ही हो...
नव वर्ष की आप को भी हार्दिक शुभकामनाएँ

Murari Pareek said...

HAPPY NEW YEAR

ज्योति सिंह said...

नव वर्ष के अभिनंदन में,
हम-तुम मिल कर वचन करें,
कदम से कदम मिला कर ही,
हम-तुम मिल कर कदम चलें,
sabse pahle nav varsh mangalmaya ho ,rachna bahut sundar hai ,aapse jud kar achchha laga ,jaate varsh me bhi doston ki saugat mil rahi hoon ,shukriyaan aane ke liye .

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

नव वर्ष की अशेष कामनाएँ।
आपके सभी बिगड़े काम बन जाएँ।
आपके घर में हो इतना रूपया-पैसा,
रखने की जगह कम पड़े और हमारे घर आएँ।
--------
2009 के ब्लागर्स सम्मान हेतु ऑनलाइन नामांकन
साइंस ब्लॉगर्स असोसिएशन के पुरस्कार घोषित।

alka sarwat said...

नए साल में हिन्दी ब्लागिंग का परचम बुलंद हो
स्वस्थ २०१० हो
मंगलमय २०१० हो

पर मैं अपना एक एतराज दर्ज कराना चाहती हूँ
सर्वश्रेष्ठ ब्लॉगर के लिए जो वोटिंग हो रही है ,मैं आपसे पूछना चाहती हूँ की भारतीय लोकतंत्र की तरह ब्लाग्तंत्र की यह पहली प्रक्रिया ही इतनी भ्रष्ट क्यों है ,महिलाओं को ५०%तो छोडिये १०%भी आरक्षण नहीं

श्रद्धा जैन said...

aapko bhi naye saal par hardik shubhkamanaayen
naye saal mein kalam aur zor pakde dua hai

सर्वत एम० said...

नए वर्ष की ढेरों शुभकामनाओं के साथ शुक्रगुजार हूँ आपका कि आप ने नाचीज़ के ब्लॉग तक आने की न सिर्फ जहमत उठाई बल्कि शेरों की बहुत बेहतर ढंग से समीक्षा भी की.
हम शायद पहली रूबरू हो रहे हैं और मुझे यह दुःख है कि इतनी देर क्यों हुई.
नए वर्ष पर आपकी रचना ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया. हम आज इतनी गयी बीती हालत में पहुँच गए हैं कि जो हमारी विशेषताएँ-गुण होने चाहिए थे, हम कविताओं-लेखों में उनकी कामना करने पर मजबूर हैं.
आपने अच्छा नहीं, बहुत अच्छा लिखा है. मेरी कामना/दुआ है कि आप के लेखन का ग्राफ ऊंचाइयों की ओर बढ़ता रहे.
एक बात पूछूं-- मेरे ब्लॉग का पता किस ने दिया?नए वर्ष की ढेरों शुभकामनाओं के साथ शुक्रगुजार हूँ आपका कि आप ने नाचीज़ के ब्लॉग तक आने की न सिर्फ जहमत उठाई बल्कि शेरों की बहुत बेहतर ढंग से समीक्षा भी की.
हम शायद पहली रूबरू हो रहे हैं और मुझे यह दुःख है कि इतनी देर क्यों हुई.
नए वर्ष पर आपकी रचना ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया. हम आज इतनी गयी बीती हालत में पहुँच गए हैं कि जो हमारी विशेषताएँ-गुण होने चाहिए थे, हम कविताओं-लेखों में उनकी कामना करने पर मजबूर हैं.
आपने अच्छा नहीं, बहुत अच्छा लिखा है. मेरी कामना/दुआ है कि आप के लेखन का ग्राफ ऊंचाइयों की ओर बढ़ता रहे.
एक बात पूछूं-- मेरे ब्लॉग का पता किस ने दिया?नए वर्ष की ढेरों शुभकामनाओं के साथ शुक्रगुजार हूँ आपका कि आप ने नाचीज़ के ब्लॉग तक आने की न सिर्फ जहमत उठाई बल्कि शेरों की बहुत बेहतर ढंग से समीक्षा भी की.
हम शायद पहली रूबरू हो रहे हैं और मुझे यह दुःख है कि इतनी देर क्यों हुई.
नए वर्ष पर आपकी रचना ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया. हम आज इतनी गयी बीती हालत में पहुँच गए हैं कि जो हमारी विशेषताएँ-गुण होने चाहिए थे, हम कविताओं-लेखों में उनकी कामना करने पर मजबूर हैं.
आपने अच्छा नहीं, बहुत अच्छा लिखा है. मेरी कामना/दुआ है कि आप के लेखन का ग्राफ ऊंचाइयों की ओर बढ़ता रहे.
एक बात पूछूं-- मेरे ब्लॉग का पता किस ने दिया?

Prem said...

आपकी सुंदर भावनाओं को हमारा सलाम । प्रभु करे सब ऐंसा ही हो ,नव वर्ष आपके लिए मंगलमय हो

रश्मि प्रभा... said...

naya saal hum sabki rachna me nikhaar laye.........shubhkamnayen

रावेंद्रकुमार रवि said...

अभिनव ढंग से किया गया है - नए वर्ष का अभिनंदन!

ओंठों पर मधु-मुस्कान खिलाती, रंग-रँगीली शुभकामनाएँ!
नए वर्ष की नई सुबह में, महके हृदय तुम्हारा!
संयुक्ताक्षर "श्रृ" सही है या "शृ", उर्दू कौन सी भाषा का शब्द है?
संपादक : "सरस पायस"

kshama said...

Harek pankti behtareen hai!

नरेन्द्र व्यास said...

धर्म बना हो राष्ट्रमान,
कर्म बना हो समभाव,
नव वर्ष का अभिनंदन हो,
धर्म-कर्म का न बंधन हो,
बहुत ही अच्छा भाव है। बधाई!!