Saturday, March 26, 2011

गुनगुने ...

बात बिगड़ते देख वो
मस्तमौला हो लिए !

तैश सी बातें सुने जब
डगमग डगमग हो लिए !

ना ठंडे, ना गरम
सम्‍बन्‍ध गुनगुने कर लिए !

कौन ठिठुरता ठण्ड में
या झुलसता धूप में !

न इधर, न उधर
पकड़ी एक नई डगर !

बीच के रस्ते सुहाने
जानकर और मानकर !

नेता, अफसर, पत्रकार
गुनगुने-गुनगुने से हो लिए !!

7 comments:

akhtar khan akela said...

bhtrin chitrn prtutikaran mubark ho . akhtar khan akela kota rajsthan

प्रवीण पाण्डेय said...

सब अपनी गर्माहट में रमे।

Deepak Saini said...

वाह क्या बात है
आजकल तो इसी गुनगुने पन का फैशन है

राज भाटिय़ा said...

बहुत खुब जी

Apanatva said...

gungune shavd ka prayou bada suhana raha.

Apanatva said...

prayog shavd se tatpary tha...

Kajal Kumar said...

नेता, अफसर के साथ—साथ पत्रकार का गुनगुना होना बड़ी मुश्किल से स्थापित हो पाया है !!