Sunday, July 17, 2011

कदम कदम !

रोज कदम हों
नए नए
और रोज बढ़ें हम
कदम कदम
एक दिन
मंजिल आ जायेगी
जब रोज चलें हम
कदम कदम !

कदम उठाएं
कदम बढाएं
कदम चलाएं
चलते जाएं, बढ़ते जाएं
न ठहरें, न थमें कहीं
एक मंजिल हो, एक कदम हों
तुम और हम हों, कदम कदम !

कदम कदम
हम चलते जाएं
चलते जाएं, बढ़ते जाएं
तूफानों से लड़ते जाएं
न हारें
और न घवराएं
पहुँच रहे हैं, पहुँच गए हैं
तेरे मेरे, हम सब के
मंजिल मंजिल, कदम कदम !!

5 comments:

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

हम भी हमकदम हैं आपके..

संजय भास्कर said...

बहुत खूब, लाजबाब !
......श्रावण मास की हार्दिक शुभकामनायें !
जय भोलेनाथ

: केवल राम : said...

मंजिल आ जायेगी
जब रोज चलें हम
कदम कदम !


प्रेरक पंक्तियाँ ...!

सूर्यकान्त गुप्ता said...

नाइस्……॥

प्रवीण पाण्डेय said...

हर कदम एक मंजिल,
हरेक दम एक मंजिल।