Tuesday, October 5, 2010

है हिन्दोस्तां हमारा !

हिन्दू - मुसलमां
सोचो और समझो
मंदिर - मस्जिद
या शान्ति - सौहार्द्र
कब तक चलेंगे
ये मजहब के मुद्दे
कब हम कहेंगे
है हिन्दोस्तां हमारा !

भड़काऊ भाषण
झूठी मोहब्बत
वोटों की नीति
चुनावों के मुद्दे
मतलब की बातें
मतलब के नेता
कब हम कहेंगे
है हिन्दोस्तां हमारा !

बस्ती अमन की
कत्लों के मंजर
सन्नाटे से दिन
तूफानों सी रातें
कब तक चलेंगे
ये शोर - शराबे
कब तक जहन में
हम हिन्दू-मुसलमां
कब हम कहेंगे
है हिन्दोस्तां हमारा !

10 comments:

सतीश सक्सेना said...

सद्विचार और सत्संग ! उदय भाई आभार

महेन्द्र मिश्र said...

बहुत बढ़िया बात कहीं रचना में प्रेरक रचना...

योगेन्द्र मौदगिल said...

achhi kavita...wah..

संजय भास्कर said...

हर बार की तरह शानदार प्रस्तुति

संजय भास्कर said...

आदरणीय 'उदय' जी
नमस्कार !

कमाल की लेखनी है आपकी लेखनी को नमन बधाई

प्रवीण पाण्डेय said...

सामयिक उद्गार।

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुंदर बात कही आप ने इस कविता मे, धन्यवाद

kshama said...

कब तक जहन में
हम हिन्दू-मुसलमां
कब हम कहेंगे
है हिन्दोस्तां हमारा !
Tab tak kahenge,jab tak sab hamara saath na dene lag jayen...baar,baar kahenge....kabhi to log sunenge!

सुधीर said...

आपने बहुत ही अच्छा लिखा है। बधाई।

http://sudhirraghav.blogspot.com/

दिगम्बर नासवा said...

खड़का दिया आज तो .... बहुत खूब ...