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Monday, May 7, 2018

The Ideology

"One Ideology, one Religion, one Nation
no
sorry friends
not possible to me,

Yes, I know, I am not a Butterfly
but
all Flowers are mine,

Yes, I am not a Bird
but
whole sky is mine,

Yes, I am not a God
but
whole world is mine."

~ uday 

Saturday, September 30, 2017

सच .. मैं .. रावण हूँ ... !

अबे .. चूजो ...
घोंचुओ ...
भोंपुओ ...
पप्पुओ ... चप्पुओ ...

रात-दिन .. दुम हिलाने वाले टट्टुओं ...
अब तुम ...
राम बनने की कोशिश ... न करो ....

क्या तुम मेरे पुतले को जलाकर राम बन जाओगे ???

सुबह-शाम .. तलुए चाँटने वाले स्वयं-भू सूरमाओ
क्या तुम्हें तनिक भी शर्म नहीं है ... ?
क्या तुम्हारे अंदर का खून पानी हो गया है ... ?
क्या तुम्हारा जमीर मर गया है ... ?

जो तुम .. मेरे पुतले के सामने ... सीना ताने खड़े हो
जलाओ ...
चलाओ तीर ...
फूंक दो .. मुझे .... और ...
अकड़ के खड़े रहो .. बिना रीढ़ वालो ..... !!

शायद .. तुमसे ...
भृष्टाचारियों ... मिलावटखोरों .... ठगों .....
ढोंगियों .. पाखंडियों .. के विरुद्ध .. कुछ होगा भी नहीं ...

क्यों ? ... क्योंकि -
तुम्हें ..
मेरा पुतला .. जलाने ... देखने ... तालियाँ बजाने ...
की आदत-सी हो गई है ... !

गर .. दम है ... तो ....
जला के दिखाओ ... उसे .. उन्हें ... जिनमें मैं ....
आज भी ज़िंदा हूँ .. जी रहा हूँ ....
हाँ .. सच ... मैं .. रावण हूँ .... अजर हूँ .. अमर हूँ .... !!!

Wednesday, March 29, 2017

Life ...

life is a race of without goal
because ...
death is defenitely not a goal

then ...
why we are racing ..
why we are running ...

why we are not smoothly enjoying life
without fear ... without greed ...

why ...
why we are not living for eachother ... ?
Why we are not being honest ... ??
Why ... why ... why ... ???

Sunday, June 5, 2016

अब दरख्तों को भी छाँव की जरुरत है !

अब दरख्तों को भी छाँव की जरुरत है
पानी ... बूँदों ... और ...
शीतल हवाओं की जरुरत है,

तपन से
जलन से 

सिहरते पत्तों को
फूलों को 

सुकूं भरी बाँहों की जरुरत है 
साये की जरुरत है,

तुम्हारी भी जरुरत है
हमारी भी जरुरत है ..... ??

~ श्याम कोरी 'उदय' 

Tuesday, July 16, 2013

बलात्कारियों का शहर ...

सावधान ...
हम 
बलात्कारियों के शहर में प्रवेश कर चुके हैं !

अब 
अगले तीन घंटे तक 
सभी पर्यटकों से अनुरोध है 
कि -
वे ..... अपनी बच्चियों व नारियों की ...
सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें !!

खासतौर पर 
नौजवान महिलाएँ .... 
स्वयं अपना ...
व अपने शरीर के महत्वपूर्ण अंगों का ...
दायें से, 
बायें से, 
आगे से, 
पीछे से ...
विशेष ख्याल रखें !!!

क्यों ? ... क्योंकि - 
यह ........ बलात्कारियों का शहर है !!!!!

Tuesday, February 14, 2012

उनके जैसा ...

लाख हिदायतों के बाद भी
हुआ इतना ही है
कि वो
मेरे जैसे नहीं हो जाए
पर, हाँ
उनके कुछ कहे बगैर ही
देखो
मैं बिलकुल उनके जैसा
कठोर, निर्दयी हो गया हूँ !!

चराग-ए-मुहब्बत ...

'खुदा' जाने है, उनकी गलियों में
चराग-ए-मुहब्बत ...
कितने जलाए हैं हमने !
तब कहीं जाके ... बामुश्किल
कदम उनके, हम तक आए हैं !!

Tuesday, February 7, 2012

बदकिस्मत ...

जिसने देखे नहीं, सूखे चूल्हे गरीबों के !
न जाने क्यूँ -
वो खुद को, बदकिस्मत कहता है !!

जिसने देखे नहीं, अध-नंगे तन गरीबों के !
न जाने क्यूँ -
वो खुद को, बदकिस्मत कहता है !!

जिसने देखे नहीं, भूख में सोते बच्चे गरीबों के !
न जाने क्यूँ -
वो खुद को, बदकिस्मत कहता है !!

जिसने देखे नहीं, बगैर इलाज मरते बच्चे गरीबों के !
न जाने क्यूँ -
वो खुद को, बदकिस्मत कहता है !!

विरासतों में मिली अमीरी-गरीबी को भी देख
न जाने क्यूँ -
वो खुद को, बदकिस्मत कहता है !!

दबे, कुचलों को मिल रही सरकारी मदद को देख
न जाने क्यूँ -
वो खुद को, बदकिस्मत कहता है !!

Sunday, February 5, 2012

हसीन कवि की कविताएँ ...

वह
बहुत अच्छी
कविताएँ लिख रही है
पर
थोड़ी-सी शंका है !
क्या ?

वह खुद लिख रही है
या
कोई और
उसके नाम से लिख रहा है !

क्यों, क्योंकि -
अक्सर सुनते रहे हैं
कि -
कई लोग
फास्ट पब्लिसिटी के लिए
नाम बदल कर
किसी हसीन नाम से भी लिखते हैं !!

वैसे, कोई बुराई नहीं है !
शब्द और भाव
तो पैदा करने ही होंगे !!
नहीं तो,
नाम कब तक काम आयेगा !!!

Saturday, February 4, 2012

साहित्यिक गणित ...

भईय्या प्रणाम ...
आओ अनुज आओ, क्या ख़ास है ?
आपका आशीर्वाद है भईय्या !
अच्छा, कुछ ख़ास नहीं है !!
तो आओ, बैठो ...
आज तुम्हें कुछ नया सिखाते हैं !
जी भईय्या ...
लेपटॉप पर ... फेसबुक ...
अच्छा, तो ये तुम्हारी फ्रेंड लिस्ट है !
जी भईय्या ...
तो एक काम करो -
इसे माईनस, इसे प्लस, इसे प्लस
इसे माईनस, इसे माईनस, इसे माईनस
इसे लाईक, इसे कमेन्ट, इसे कमेन्ट, इसे लाईक
इसे छोडो, इसे छोडो, जाने दो, आगे बढ़ो ...
ठीक है, अब तुम इसी फारमेट में ...
ये क्या है भईय्या ... कुछ समझ नहीं आया !!
धीरे धीरे समझ जाओगे ... दो-तीन दिन में ...
ये कुछ और नहीं ... साहित्यिक गणित है !!!

वोट ...

सच ! हर बार की तरह
इस बार भी
उनकी मंशा ठीक नहीं है
बार बार
सिर्फ वोट की बात कर रहे हैं
वोट मांग रहे हैं
वोट हमें दो, कह रहे हैं
सिर्फ ... वोट ... वोट ...
कोई और बात नहीं !
उफ़ ! क्या किया जाए ??

क्या कहने ...

जन्मदिन ...
शादी की सालगिरह ...
सच ! क्या कहने !!
किसने रोका है तुझे
और कौन रोकेगा तुझे
आज का दिन ...
है तेरा, जब तलक चाहो
तुम मचलते रहो !!!

Thursday, February 2, 2012

हे राम !

गूंगे-बहरे-अंधे
मिलकर तीनों अमर हो रहे
हे राम !!

गूंगे-बहरे-अंधे
मिलकर तीनों नांच-गा रहे
हे राम !!

गूंगे-बहरे-अंधे
बंदर-बाँट में मस्त हो रहे
हे राम !!

Monday, January 30, 2012

प्रेम ...

सिर्फ
एक वजह नहीं है
तुम्हारे प्रति आकर्षण की
कि -
तुम खूबसूरत हो !
एक वजह और भी है
कि -
तुम, मुझे -
अच्छी लगती हो !
जिसे लोग क्या कहते हैं ?
यह तो मैं नहीं जानता
पर, हाँ
जानता हूँ, तो सिर्फ इतना
कि -
मुझे, तम्हारी -
आँखों से
मुस्कान से
बातों से, तुमसे, प्रेम है !!

Saturday, January 28, 2012

फूट ले ...

अबे ऐ ...
तू ...
हाँ तू ...
इधर आ ...
हाँ हाँ तू ...
इधर-उधर क्या देख रहेला है ...
और कौन है रे ... यहाँ पर ...
जो तू ... इधर-उधर ...
साले ... दूं क्या एक कान के नीचे ?
चिरकुट कहीं का ...
सुनता नहीं है ... इशारा नहीं समझता ...
चल चल ... बहुत हो गया ...
काय को खडा है यहाँ पे ?
फ़ोकट-फंड़ी ... साला ...
देखता नहीं ... अपुन आ गयेला है ...
बोले तो पुलिस ...
चल चल निकल ले ... नई तो ... कान के नीचे ...
जी साब ... जी साब ...
चल चल ... फूट ले ... फूट ले ... फूट ... !!

अच्छा-सच्चा ...

अपने दोस्तों, शुभचिंतकों से
कभी-कभार, एकाद बार
लड़ जाओ
भिड़ जाओ
कुछ तीखा-तीखा बोल जाओ
फिर देखो
वो
कितना अच्छा-सच्चा है
क्या मन में है
क्या दिल में है
दोस्त है
दुश्मन है
सब का सब सामने आ जाएगा
या तो सीधे-सीधे
या किसी माध्यम से ... जय हो !!

एक टेलीफोनिक कविता ...

हैलो ...
एं ...
ऊं ...
हाँ ...
एं ...
एं ...
हाँ ...
ऊं ...
हाँ ...
हाँ ...
हाँ ...
ओके बाय !!

सहमत-असहमत ...

यह जरुरी, आवश्यक नहीं है
कि -
हर एक आपसे सहमत हो
भला सहमत हो भी, तो क्यों हो ?
उसके विचार, तर्क
आपके विचारों -
तर्कों से भिन्न हो सकते हैं !
जब
दो लोगों के आपस में
विचार व तर्क भिन्न होंगे
तो असहमत होना जायज है !
सहमती या असहमती के लिए
सही अथवा गलत होना जरुरी नहीं है
विचारों व तर्कों का
आपस में भिन्न होना पर्याप्त है !!

इंतज़ार ...

उसके इंतज़ार में
आज गुस्से ही गुस्से में
उसका नाम
तीन बार, कोरे कागज़ पे
लिख लिख कर -
फाड़ कर फेंक दिया !
जैसे ही
चौथी बार नाम लिखा
उसे, सामने देख
चुपके से जेब में रख लिया
और क्या करता ?
प्यार जो करता हूँ उससे !!

Friday, January 27, 2012

किसान का मकान ...

एक के ऊपर एक
फिर
एक के ऊपर एक
ईटें जमा कर
उन पर मिट्टी का गारा चढ़ा कर
किसान
सुकूं से बैठा था !

ठीक उसी पल
घने मेघ उमड़ आए, और -
बारिश की बूँदें टपकने लगीं
देखते ही देखते
मिट्टी का गारा, ईंटों से -
निकल कर, पानी संग बह गया !

फिर से
पहले की तरह, एक बार और
किसान का मकान
बनते बनते रह गया !
और
देखते ही देखते
उसकी मेहनत पर पानी फिर गया !

अब फिर से उसे
पहले की तरह, किसी दिन
मिट्टी खोद कर
गारा -
और मकान बनाना पडेगा
कहीं, फिर से
उस दिन भी बारिश न आ जाए ... !!