Monday, August 9, 2010

बड़े ब्लॉगर - छोटे ब्लॉगर

बड़े ब्लॉगर - यार तुम लोग अभी अभी ब्लागिंग में आये हो जमने के लिए जी-तोड़ मेहनत करनी पड़ेगी
छोटे ब्लॉगर - क्या क्या करना पडेगा भाई साहब

बड़े
ब्लॉगर - सबसे पहले तो स्थापित ब्लागरों के संपर्क में रहना पडेगा तथा उनके ब्लॉग-पोस्ट पर निस्वार्थ भाव से टिप्पणी करनी पड़ेंगी, पोस्ट अच्छी हो या ... ।
छोटे ब्लॉगर - हां समझ गया भैया, और क्या करना पडेगा ?


बड़े ब्लॉगर - दो-चार धुरंधर ब्लागरों को अपना गुरु मान लेना,जल्द ही ब्लागिंग में स्थापित हो जाओगे और तुम्हारी रेंकिंग भी वे ऊपर कर देंगे
छोटे ब्लॉगर - भैया ये रेंकिंग ऊपर कर देना उनके हाँथ में रहता है ?


बड़े ब्लॉगर - और नहीं तो क्या, उनके बांये हांथ का खेल है वे जिस ब्लॉग को चाहें दना-दन ऊपर ले जा सकते हैं , अब ये मत पूछना की ऐसा कैसे करते हैं जब साथ में रहोगे तो सब सीख जाओगे
छोटे ब्लॉगर - भैया एक बात और बता देते ... मैं अच्छा लिख नहीं पाता हूं ... क्या मेरी पोस्टें भी ऊपर हो जायेंगी ?


बड़े ब्लॉगर - उसकी चिंता तुम छोड़ दो ... हम जिसे चाहें उसे उसकी पोस्ट को ऊपर ले जा सकते हैं ... तुम जब कभी भी देखोगे जितनी पोस्ट ऊपर रहती हैं ... उसमें लगभग ८० प्रतिशत "सड़ी-गली" पोस्टें ही ऊपर रहती हैं ... हम लोग अच्छी प्रभावशाली पोस्टों को ऊपर चढ़ने ही नहीं देते
छोटे ब्लॉगर - धन्य हैं आप लोग .... और धन्य है आपकी ब्लागरूपी मायानगरी .... आपकी इसलिए, क्योंकि आप लोग अप्रत्यक्ष रूप से संचालित कर रहे हैं ... मैंने अपना पहला गुरु तो आप को मान लिया है, दूसरा,तीसरा,चौथा कौन कौन रहेगा आप ही बता दें ... मैं सीधा जाकर उनके चरणों मैं बैठ जाता हूँ ... मैं पुन: हाजिर होता हूँ आपका आशीर्वाद प्राप्त करने ... दंडवत प्रणाम

23 comments:

Udan Tashtari said...

मैं भी आपको गुरु मान लेता हूँ...दंडवत प्रणाम । ///// कुछ भला करो प्रभु!!!

चतुरानंद said...

जय जय हो गुरु
आपकी लीला अपरम्पार है।

चतुरानंद said...

डम डम डम

राजभाषा हिंदी said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति।
राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।

Mrs. Asha Joglekar said...

जोरदार व्यंग । जय हो गुरू ।

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari said...

जय हो, स्‍वामी गुरूआनंद तीर्थ महाराज, ब्‍लॉगगुरू की जय हो, उन्‍हीं के इशारे पर यह समस्‍त आभासी ब्‍लॉगजगत संचालित है वो जिसको चाहें उपर उठा दे जिसको चाहें धूल चंटा दें ....

जय हो, स्‍वामी गुरूआनंद तीर्थ महाराज की जय हो. .... पर ये पोस्‍ट या ब्‍लॉग उपर जाना क्‍या कोई अंतिम लक्ष्‍य है, क्‍या ब्‍लॉगजगत में दबदबा कायम रखने के जुगत से भारत रत्‍न मिल जाएगा .... हो सकता है मिल जाए ... जय जय ब्‍लॉगिंग. .... फोड़ दे बाजा ऐसे चेलों और गुरू महराजों का.

... उदय भाई जिन्‍दाबाद ...

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari said...

हरेली तिहार के आप ला गाड़ा गाड़ा बधई.

ali said...

ऊपर ?
वहां से लौट कर आना हो पायेगा :)

anshumala said...

लो जी गुरु तो मान लिया आपको अब मेरी पोस्ट का कुछ भला तो कीजिये

kshama said...

Ha,ha,ha! Jay jaykaar!

खुशदीप सहगल said...

मेरे गुरुदेव समीर जी ने आपको अपना गुरु माना इसलिए आप मेरे भी गुरु...

वैसे गम़ (मुद्दे) और भी है ज़माने में लिखने को ब्लॉगिंग और ब्लॉगरों के सिवा...

जय हिंद...

सतीश सक्सेना said...

बढ़िया सामयिक व्यंग्य है उदय जी शुभकामनायें !

वन्दना said...

बढिया व्यंग्य।

ताऊ रामपुरिया said...

जय हो गुरूदेव की.

रामराम.

महेन्द्र मिश्र said...

सामयिक व्यंग्य है,,,जय हो,,,

Anaam said...

बहुत बढ़िया व्यंग्य है! आप इसे पिछले कुछ महीनों से बिलानागा बारंबार पोस्ट करते आ रहे हैं. आपके जीवट को साधुवाद! एक दिन दुनिया मान जायेगी आपके इस प्रयास की महत्ता को!

अजय कुमार झा said...

क्या उदय जी .......आप भी न ..

हमें लगा कि दोनों के बीच कोई ट्वेंटी ट्वेंटी मैच की कोई घोशणा वैगेरह है ..हम तो मैच का टिकट बुक कराने आए थे ...आपने तो पिक्चर ही द एंड कर दी ।

महफूज़ अली said...

मुझ जैसे दो कौड़ी के ब्लोग्गर को .... भी कोई ऊपर पहुंचा दे... भगवन...

संजय भास्कर said...

बढ़िया सामयिक व्यंग्य है उदय जी

Suman said...

nice

ललित शर्मा said...

उम्दा पोस्ट के लिए धन्यवाद


ब्लॉग4वार्ता की 150वीं पोस्ट पर आपका स्वागत है

Mired Mirage said...

अच्छा , ऐसा भी होता है! रोचक पोस्ट है।
घुघूती बासूती

अमि'अज़ीम' said...

गुरु जी, मुझे भी अपना शिष्य मान लें