Sunday, July 10, 2011

... गिराने से, गिर जाने से, सरकार !!

कविता : सरकार !

कईयों ने, कई लोगों ने
बहुत हिम्मत की
और बहुत जोर लगाया
पर, न गिरा पाए
और न ही हिला पाए
सरकार !

सच ! जोर ...
तो, जी-तोड़ लगाया
पर, शायद, कहीं
चूक हो गई
गिराने, हिलाने में
सरकार !

नहीं तो, कब की
गिर जाती, क्या रखा है
कौन-सी मजबूत है
दो-चार, लंगड़े-लूले
खम्बों, पे ही तो टिकी है
और खुद की, दीवारें भी
तो कमजोर हैं
हिल रही है, खुद-ब-खुद
सरकार !

फिर भी
अब क्या कहें
अब किसी का, हाँथ
थोड़े ही न पकड़ सकते हैं
मदद करने को, मदद को
बे-वजह ही, गिराने में
सरकार !

हम, हम को
किसी से, क्या लेना-देना
कौन-सा हमको
कुछ, फ़ायदा होने वाला है
मदद करने से, या
गिराने से, गिर जाने से
सरकार !!

1 comment:

anu said...

kya sarkar aise gir sakti hai?????