Thursday, July 14, 2011

बम धमाके ...

बम धमाके ...
शोर-गुल, सनसनी, दहशत
भगदड़, अफरा-तफरी
रोते-गाते
छिपते-भागते
कुछ, थम से गए ...
इधर-उधर, चारों ओर !

कुछ
लहू-लुहान
तड़फते - बिलखते
कुछ के चिथड़े उड़े हुए
तो कुछ
चिथड़ों चिथड़ों में
मरे, बिखरे हुए !

कुछ
मरे, अधमरे
कौन, कौन था ?
कौन, किसका था ?
पहचानना मुश्किल
देखते देखते
आसपास भीड़-भाड़ !

पुलिस, गाड़ियां
फायर बिग्रेड, एम्बूलेंस
मीडिया, कैमरे
चारों ओर
शोर
जांच, पड़ताल, पूछताछ !

लाशें उठने लगीं
घायल
अस्पताल की ओर
हो-हल्ला, खौफ, दहशत
गवाह, संदेही, पुलिस
ब्रेकिंग न्यूज ...
पांच मरे, पच्चीस घायल, हाई एलर्ट !!

3 comments:

शहरोज़ said...

तीखी रचना. ज़रूरी और बेहद पठनीय!
हमज़बान की नयी पोस्ट आतंक के विरुद्ध जिहाद http://hamzabaan.blogspot.com/2011/07/blog-post_14.htmlज़रूर पढ़ें और इस मुहीम में शामिल हों.

अरूण साथी said...

बहुत करारा।
बहुत सुन्दर।

प्रवीण पाण्डेय said...

दुर्दशा।