Monday, March 28, 2011

सुहागरात !!

( विशेष नोट : - एक कहानी लिख रहा हूँ उसके अंश प्रस्तुत हैं .... पार्ट - .... )

करीना क्या बात है, आज तू बहुत खुश लग रही है !
हाँ प्रियंका, आज मैं बहुत खुश हूँ, आज रात मेरी नई शादी है, सुहागरात है !
सच, ये तो बहुत खुशी की बात है, पर किसके साथ !
वो अपने सेठ जी हैं , बड़ी कोठी वाले, सरकार में मंत्री बन गए हैं, उनके साथ !
अरे वो तो बूढा हो गया है !
अपने को उससे क्या, क्या जवान और क्या बूढा, अपने को तो रुपयों से मतलब है, आज रात उसकी दुल्हन ... पर खुशी की बात तो है वह मंत्री जो ठहरा !

हाँ ये भी ठीक है, अपुन लोगों की तो रोज ही शादी और सुहागरात होती है, आज तू किस्मत वाली है जो मंत्री के साथ किसी आलीशान कोठी और मखमली बिस्तर पर सुहागरात मनायेगी .... सच तू खुशनसीब है ... कितने रुपये मिले !
दस हजार एडवांस में मिल गए हैं ... और बांकी कुछ शायद मंत्री खुश होकर तो दे ही देगा !

हाँ ... सच कह रही है तू करीना ... चल ठीक है ... मैं चलती हूँ थक गई हूँ !
अरे, क्यूं, क्या हुआ प्रियंका, कैसे थक गई !
अरे यार ... आज दिन में ही .... एक बड़े साहब का बुलावा गया था ... तू तो जानती है दिन में ... साहब के साथ दौरे पर ... वो मजा नहीं आता .... जो रात में होता है ... चल चलती हूँ ... कल बताना अपनी सुहागरात की कहानी ... बाय ... ख्याल रखना अपना !
ठीक ... बाय !

दूसरे दिन करीना और प्रियंका मिले -
यार करीना सुना ना ... कैसी रही तेरी शादी और ... !
प्रियंका ... सच मजा गया ... कल रात बजे ही एसी गाडी गई थी लेने ... बैठकर गई ... सीधे एक फ़ार्म हाऊस में जाकर रुकी ... क्या आव-भगत हुई ... चिकन, मछली, विदेशी शराब ... यूं कहूं तो बस मजा ही मजा था ... मंत्री की आँखे मुझे देखकर फटी की फटी रह गईं .... शायद पहले कभी मेरे जैसी २१-२२ साल की जवान लड़की वो भी गोरी-नारी ... मुझे देखते ही गले लगा लिया और चूमने लगा ... फिर क्या था मजे ही मजे !
यार करीना, तू सचमुच बहुत लकी है ... तुझे हरदम ... यार ये बता फिर क्या हुआ !

फिर होना क्या था ... मंत्री पैग बनाने लगा ... और मैं बाथरूम में जाकर ... नहा धोकर फ्रेश होकर बाहर आई ... ग्राहक के मन की इच्छा के अनुरूप सिर्फ टाबेल को लपेट कर ... जानती हूँ ग्राहक हमेशा बिना कपड़ों के ही देखना चाहता है ... तू तो जानती है इस बात का मैं विशेष ध्यान रखती हूँ ... ग्राहक को हमेशा ही भगवान मानती हूँ और खुद को हमेशा ... पूजा और भोग की सामग्री !
सही कहा करीना ... तू सचमुच झक्कास आईटम है ... तेरा तो कोई जवाब नहीं है ... फिर क्या हुआ !
फिर ... मुझे देखते ही हाथ पकड़ कर अपनी जांघ पर बिठा लिया और मुझे चूमते हुए ... पैग का गिलास उठाकर मुझे एक घूँट पिलाया और खुद पीने लगा ... क्या बताऊँ प्रियंका ... जब उसने मुझे चूमा और एक घूँट पिलाया ... फिर उसने उसी पैग को पिया तो ऐसा लगा ... जैसे जन्नत में सुहागरात मना रही हूँ !

फिर ... आगे भी तो बता ... मुझे तो जलन हो रही है सुनकर ... फिर भी बता ... आगे क्या हुआ !
... अब आगे क्या ... तू तो जानती है मुझे ... मैंने भी उसे खुश करने में कोई कसर नहीं छोडी ... उसने जो जो सोचा नहीं होगा ... उससे भी कहीं ज्यादा मैंने उसे सुख दे दिया ... उसे लगा हो जैसे किसी जन्नत की अप्सरा के साथ रात बिताई हो ... सच ... बेहद हंसी सुहागरात थी ... बहुत मजा आया ... और तो और अभी मैंने जब अपना पर्स देखा तो उसमें एक एक हजार के पांच नोट रखे थे और मंत्री का मोबाइल नंबर भी ... प्रियंका, कल की रात किसी जन्नती सुहागरात से कम नहीं थी !!
.... क्रमश: - पार्ट - ब्रेक के बाद ....

3 comments:

कमलेश भगवती प्रसाद वर्मा said...

uday ji aap badal rahe hain apni vidha jiske aap prateek ban gaye the...chlo aap ki matzi ...best of luck...

'उदय' said...

kamlesh ji ... jab bhee ... kahaani aage badhaane ke liye ... page par aataa hoon ... aapkee tippani ... break lagaa detee hai ... khair ... dekhte hain ... fir kabhee ... !!

Mirchi Namak said...

उदय जी कहानी तो बडी चट्कारेदार है पर आप की विधा के अनुरुप नही है बाकी आप स्वयं मर्मग्य है।