Tuesday, March 9, 2010

"थ्री इडियट्स" एक अश्लील फिल्म है !!!

परिवार के सदस्यों ने, मित्रों ने, जान पहचान वालों ने तारीफ़-पे-तारीफ़ की "थ्री इडियट्स" फ़िल्म बहुत अच्छी है बार-बार देखने लायक है, हां सच है फ़िल्म बहुत अच्छी है एक बेहतरीन "थीम" पर बनाई गई है पर इस फ़िल्म ने तो अश्लीलता की हदें ही पार कर दी हैं ..... अब आप कहेंगे अश्लीलता तो कहीं दिखाई ही नही दी ..... सही कहा इस फ़िल्म में अश्लीलता को "दादा कोंडके" के स्टाईल मे परोसा गया है कहने का तात्पर्य ये है कि जो महसूस कर सकता है उसे अश्लीलता दिखेगी और जो महसूस नहीं कर सकता वह "कामेडी" समझ हंस कर निकल जायेगा "..... तुसी ग्रेट हो जहांपनाह ..... तोहफ़ू कबूल कीजिये...." ये डायलाग फ़िल्म मे तीन-चार बार फ़िल्मांकन किया गया है इस "सीन" में एक इंसान व्यवहारिक रूप से दूसरे इंसान से किसी शर्त अथवा बातचीती मुद्दे पर हार जाता है तो वह हारने वाला जीतने वाले के समक्ष अपनी हार स्वीकारते हुये अपनी पेंट उतार कर कमर झुका कर अपना पिछवाडा उठा कर झुक जाता है और कहता है .... तुसी ग्रेट हो जहांपनाह ... तोहफ़ू कबूल कीजिये ..." ....... अब पेंट उतार कर "पिछवाडा" ऊंचा कर किसी के सामने झुक जाना और कहना "तोहफ़ा" कबूल कीजिये इसका सीधा-सीधा मतलब तो सभी समझते हैं समझाने की आवश्यकता नहीं है ........... फ़िल्मों में अश्लीलता की हदें पार हो रही हैं, क्या "सेंसर बोर्ड" अब अपनी भूमिका "मूकबधिर" की भांति अदा कर रहा है ?

8 comments:

राजभाषा हिंदी said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति! राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।

मनोज कुमार said...

बहुत-बहुत धन्यवाद

निर्मला कपिला said...

धन्यवाद इस जानकारी के लिये अच्छा हुया अभी हमने नही देखी।

वन्दना said...

ashlilta ki had kahan paar nhi ho rahi magar aaj sab mookbadhir ho chuke hain ........yadi dekha jaye to comedy circus vagairah jitne bhi comedy programmes hain sabmein ashlilta ki had par hoti hai aur is had tak ki bachchon ke samne baithkar dekhne mein khud ko sharam aa jati hai .......aaj har channel , har movie aur har programme mein shalinta hai hi nhi aur rokne wala koi nhi hai sab TRP badhane ke liye kuch bhikar sakte hain ya movie ki publicity ke liye kuch bhi kar sakte hain phir chahe aam insaan ki bhavnayein aahat hi kyun na hon.

राज भाटिय़ा said...

इसी लिये मै आज कल की कोई भी फ़िल्म नही देखता, गंदगी जेसे भी पेश की जाये वो रहेगी तो गंदगी, आप का धन्यवाद

jindaginama said...

aapne thik hi tark diye hain.

kuldeep said...

with the change of time, the taste of people has also changed. and no movie can run for long if it does not show the truth of prevailing society. except this particular dialogue the whole picture is worth watch and my favorite. the message it has left is worth more. why not follow " saar saar ko gahi rahe, thotha dehi uday."

Durgesh Ichake said...

i agree with you sir ji.