Saturday, November 5, 2011

बेटी ...

बाबुल के गाँव की -
तुलसी
पिया घर पहुँच के -
पीपल हुई है !

हुआ करती थी जो
खुद आँगन की रंगोली
पहुँच ससुराल वह -
पांव की मेंहदी हुई है !

दमकती थी जो
बन माथे की बिंदिया
पिया घर पहुँच के -
करधन में लटकी चाबी हुई है !

पूजी जाती थी जो
खुद गाँव में देवी की तरह
पिया घर पहुँच के -
वो आज पुजारिन हुई है !

फर्क देखो
बेटी और बहु में तुम 'उदय'
कहीं तुलसी -
तो कहीं पीपल हुई है !!

5 comments:

निवेदिता said...

बहुत खूब !!!

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

खूबसूरत रचना

Kailash C Sharma said...

फर्क देखो
बेटी और बहु में तुम 'उदय'
कहीं तुलसी -
तो कहीं पीपल हुई है !!

बहुत ख़ूबसूरत और सटीक अभिव्यक्ति..

अनुपमा पाठक said...

बहुत सुन्दर!

anuragi said...

bahut achchha bahut sadhi, sidhi, satik rachna