मुझे पता है कि मैं
लोकतंत्र हूँ ! अमर हूँ
खुद-व-खुद, मर नहीं सकता
अमरत्व का वरदान है मुझे
पर, अब मैं और जीना
सच ! बिल्कुल जीना नहीं चाहता
क्या करूंगा, जी कर
मेरे ही अंग अब
सड़ने-गलने लगे हैं,
खुद-व-खुद
उन पर कीड़े, जन्मने लगे हैं
दिल, और धड़कनें मेरी
कंप-कंपाने लगी हैं
अब सोच-विचार भी मेरे
कल्लाने-झल्लाने लगे हैं
रूह का क्या ! न जाने
कब से थर्रा रही है
भ्रष्ट, भ्रष्टतम, भ्रष्टाचार से
हुआ, बहुत शर्मसार हुआ
बस, मुझे तुम
सच ! अब मौत दे दो !!
"चलो अच्छा हुआ, जो तुम मेरे दर पे नहीं आए / तुम झुकते नहीं, और मैं चौखटें ऊंची कर नही पाता !"
Saturday, June 11, 2011
... जी रहे हैं, मर रहे हैं, सिर्फ, सिर्फ, सिर्फ, लाचार !
सच ! चीज तो सचमुच, बड़े काम की है, फेसबुक
पर, किस चेहरे पे कौन-सा चेहरा है, कौन जाने !
...
उफ़ ! बेवजह बिखरे फिरे हम, आशिकी, में तेरी
टुकड़ों टुकड़ों में पड़े हैं, आज हम, सारे जहां में !
...
जब तलक हुश्न छलके नहीं, तो कैसे उसे हम, हुश्न कह दें
जब लबा-लब हो नहीं, तो हुश्न खुद-ब-खुद छलके कैसे !
...
दास्ताँ तेरी-मेरी, किसी तंग गली से कम कहाँ है 'उदय'
उफ़ ! तुम गुजरे तो हम ठहरे, हम गुजरे तो तुम ठहरे !
...
क्या सर और क्या सरकार, चारों ओर हैं नक्सली प्रहार
उफ़ ! जी रहे हैं, मर रहे हैं, सिर्फ, सिर्फ, सिर्फ, लाचार !!
पर, किस चेहरे पे कौन-सा चेहरा है, कौन जाने !
...
उफ़ ! बेवजह बिखरे फिरे हम, आशिकी, में तेरी
टुकड़ों टुकड़ों में पड़े हैं, आज हम, सारे जहां में !
...
जब तलक हुश्न छलके नहीं, तो कैसे उसे हम, हुश्न कह दें
जब लबा-लब हो नहीं, तो हुश्न खुद-ब-खुद छलके कैसे !
...
दास्ताँ तेरी-मेरी, किसी तंग गली से कम कहाँ है 'उदय'
उफ़ ! तुम गुजरे तो हम ठहरे, हम गुजरे तो तुम ठहरे !
...
क्या सर और क्या सरकार, चारों ओर हैं नक्सली प्रहार
उफ़ ! जी रहे हैं, मर रहे हैं, सिर्फ, सिर्फ, सिर्फ, लाचार !!
लेबल:
शेर
Friday, June 10, 2011
... जाते जाते, रूह और जमीं, एक-दूजे से खफा हो गए !!
हर रंग से जुदा हैं, रंग जिसपे खुद-ब-खुद फ़िदा हैं
बेटियाँ इस धरा में, रंग-खुशबू-प्रेम का आसमां हैं !
...
न जाने क्या कहा तुमने, न जाने क्या सुना हमने
क्या समझें, क्या न समझें, समझना भी जरुरी है !
...
वफ़ा करते करते, न जाने कब, हम बेफवा हो गए
जाते जाते, रूह और जमीं, एक-दूजे से खफा हो गए !
...
इन आँखों की गुस्ताखियों ने, मुझे तेरा दीवाना बना दिया
वरना, बता, तू खुद ही मुझे, तुझ में ऐसा रक्खा क्या है !!
बेटियाँ इस धरा में, रंग-खुशबू-प्रेम का आसमां हैं !
...
न जाने क्या कहा तुमने, न जाने क्या सुना हमने
क्या समझें, क्या न समझें, समझना भी जरुरी है !
...
वफ़ा करते करते, न जाने कब, हम बेफवा हो गए
जाते जाते, रूह और जमीं, एक-दूजे से खफा हो गए !
...
इन आँखों की गुस्ताखियों ने, मुझे तेरा दीवाना बना दिया
वरना, बता, तू खुद ही मुझे, तुझ में ऐसा रक्खा क्या है !!
लेबल:
शेर
तर-बतर ...
काली घटाओं सी
घनी रात में, चलो आ गए
सुन पुकार तेरी
हम
घने, घनघोर, बादलों की तरह !
बरसते रहे
रुक रुक कर, थम थम कर
रात भर ...
करते रहे, तुम्हें, तर-बतर
रिमझिम-रिमझिम
बारिश की तरह !
ठहरे, फिर उमड़े
कभी, बादलों सी
गड़-गड़ाहट की तरह
कभी
कौंधती, बिजली की तरह !
तुम्हें, भिगाते भी रहे
खुद, भीगते भी रहे
रात भर ...
घनी रात में, चलो आ गए
सुन पुकार तेरी
हम
घने, घनघोर, बादलों की तरह !
बरसते रहे
रुक रुक कर, थम थम कर
रात भर ...
करते रहे, तुम्हें, तर-बतर
रिमझिम-रिमझिम
बारिश की तरह !
ठहरे, फिर उमड़े
कभी, बादलों सी
गड़-गड़ाहट की तरह
कभी
कौंधती, बिजली की तरह !
तुम्हें, भिगाते भी रहे
खुद, भीगते भी रहे
रात भर ...
होते रहे, तर-बतर
रिमझिम - रिमझिम
बारिश की तरह !!
रिमझिम - रिमझिम
बारिश की तरह !!
Thursday, June 9, 2011
... फूलों में खुशबू न सही, सजावटें अच्छी हैं !!
देख के, संभल के, कदम बढाए जाएं
नशा बुरा है, चख के छोड़ दिया जाए !
...
सच ! नए दौर में, नई परम्पराएं, अच्छी हैं
फूलों में खुशबू न सही, सजावटें अच्छी हैं !
...
सच ! तेरे मेरे दरमियां, फासला उतना ही रहा
जितना तेरे मेरे बीच, फासला ख्यालों में रहा !
...
सच ! लोग हैं, जो मुफलिसी में भी, चैन से जी रहे हैं
बहुत ऐसे भी हैं जो करोड़ों रख के भी जेल जा रहे हैं !
...
सच ! अब वो पीड़ा नहीं होगी, जो जीते-जी रही होगी
साहित्यिक मठों में, जिन्दे नहीं, पूजे जाते हैं मुर्दे !!
नशा बुरा है, चख के छोड़ दिया जाए !
...
सच ! नए दौर में, नई परम्पराएं, अच्छी हैं
फूलों में खुशबू न सही, सजावटें अच्छी हैं !
...
सच ! तेरे मेरे दरमियां, फासला उतना ही रहा
जितना तेरे मेरे बीच, फासला ख्यालों में रहा !
...
सच ! लोग हैं, जो मुफलिसी में भी, चैन से जी रहे हैं
बहुत ऐसे भी हैं जो करोड़ों रख के भी जेल जा रहे हैं !
...
सच ! अब वो पीड़ा नहीं होगी, जो जीते-जी रही होगी
साहित्यिक मठों में, जिन्दे नहीं, पूजे जाते हैं मुर्दे !!
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