मुझको लुभा गई
फ़िर धीरे से, मुझमें समा गई
रोज सोचता हूं,
फ़िर धीरे से, मुझमें समा गई
रोज सोचता हूं,
छोड दूं उसको
शाम हुई ,
शाम हुई ,
उसकी याद फ़िर से आ गई
दूर भागा, तो सामने आ गई
मैं पूछता हूं ,
दूर भागा, तो सामने आ गई
मैं पूछता हूं ,
क्यों छोडती नहीं मुझको
वह "बेजुबां" होकर भी,
वह "बेजुबां" होकर भी,
मुझसे लड गई
क्यूं भागता है, डर कर मुझसे
तू सदा पीते आया है मुझे
क्या आज मै तुझे पी जाऊंगी !
ये माना,
क्यूं भागता है, डर कर मुझसे
तू सदा पीते आया है मुझे
क्या आज मै तुझे पी जाऊंगी !
ये माना,
तेरे इस "सितमगर" शहर में
हर कदम पर "बेवफ़ा" बसते हैं
डर मत
मै बेवफ़ा नहीं - मै बेवफ़ा नहीं।
हर कदम पर "बेवफ़ा" बसते हैं
डर मत
मै बेवफ़ा नहीं - मै बेवफ़ा नहीं।