Wednesday, May 9, 2012

वटवृक्ष ...


मेरे साये में शीतलता 
मीठे फलों-सी है ... 
मंद-मंद हवाओं के झौंके 
भीनी खुशबू-से हैं ... 
हर पल ... हर क्षण ...
सुकून, चैन, आराम ...
बेहिसाब हैं, मेरे साये में !
चिलचिलाती धूप हो 
या हो मुसलाधार बारिश 
तुम, मेरे साये में ... 
जिंदगी गुजार सकते हो 
मैं कोई और नहीं ...
वटवृक्ष हूँ ! तुम्हारा हूँ !!

Sunday, May 6, 2012

सबब ...


सच ! ये हुनर भी कोई उनसे सीखे 'उदय' 
बिना नकाब के, वो रुख को छिपा के चलते हैं ! 
... 
मौक़ा मिले तो देखें, तेरी आँखों का हम समुन्दर 
पलकों पे हर घड़ी, क्यूँ लहरें हिलोर भरतीं ?
... 
सच ! अब ये तो 'रब' ही जानता है 'उदय' 
हंसते-हंसते उनके शर्माने का सबब ? 

Saturday, May 5, 2012

औरत ...


मैं एक औरत हूँ, बहादुर हूँ 
एक बड़ी अफसर हूँ 
ये हूँ, वो हूँ 
दुनिया पर नैतृत्व कर सकती हूँ !
कर रही हूँ !!
मगर, फिर भी 
मैं खुद से मुक्त नहीं हूँ 
क्यों, क्योंकि - 
मैं एक औरत हूँ !
गर्भाधान ... 
प्रसव पीड़ा ... 
बच्चे को जनना ... 
यही है कुदरत का विधान !!

Friday, May 4, 2012

पलाश ...


आज में, जीने की आदत डाल लो 'उदय' 
वैसे भी, कल की दास्ताँ, देखी है किसने ?
... 
तुम कौन होते हो, बेवजह हम पे इल्जाम लगाने वाले 
चेलागिरी तो हमारा एक विजयी हुनर है 'उदय' !!
... 
तुम्हें ढेरों शुभकामनाएं माली-औ-बहारों की 
अपुन तो पलाश हैं, धूप में भी खिल जायेंगे !

ताज-औ-तख़्त ...


चलो खुद पर, हम आज एतबार कर भी लें 'उदय'
पर कोई और भी तो हो जिसपे एतबार हो हमको ?
... 
किसे, क्या मिला है अब तक, जंग जीत कर 'उदय' 
सिर्फ, ताज-औ-तख़्त जिंदगी नहीं होते !!
... 
'उदय' खेल तू खेल ले, अब हार होय या जीत 
खाली हाँथ है जाना सबको, अमर रहेगी प्रीत !