Saturday, December 4, 2010

ईमानदार भ्रष्टाचारी !

भाई साहब मैं मर जाऊंगा
मेरी धड़कनें रुक जायेंगी
सांस लेना मुश्किल हो जाएगा
मेरी बीवी घर से निकाल देगी
शान-सौकत सब चली जायेगी
किसी को मुंह दिखाने के लायक नहीं रहूँगा
मुझे करने दो, थोड़ा-बहुत ही सही
पर मुझे भ्रष्टाचार कर लेने दो !

मैं भ्रष्ट हूँ, भ्रष्टाचारी हूँ
इरादतन भ्रष्टाचार का आदि हो गया हूँ
आज तक एक भी ऐसा काम नहीं किया
जिसमे भ्रष्टाचार किया हो
लोग मेरे नाम की मिसालें देते हैं
मुझे जीने दो, मेरी हाय मत लो
मेरी हाय तुम्हें चैन से बैठने नहीं देगी
क्यों, क्योंकि मैं एक ईमानदार भ्रष्टाचारी हूँ !

मेरी नस नस में भ्रष्टाचार दौड़ रहा है
दिल की धड़कनें भ्रष्टाचार से चल रही हैं
मान लो, मेरी बात मान लो
मुझे, सिर्फ मुझे, भ्रष्टाचार कर लेने दो
तुम हाय से बच जाओगे
और मेरी दुआएं भी मिलेंगी
यही मेरी पहली और अंतिम अर्जी है
क्यों, क्योंकि मैं एक ईमानदार भ्रष्टाचारी हूँ !

20 comments:

ब्लॉ.ललित शर्मा said...

प्रशंसनीय अभिव्यक्ति

Arun sathi said...

चलिये माना तो सही...

Deepak Saini said...

आप तो नहा धोकर ही पीछे पड गये भष्ट्राचारियो के
सुन्दर अभिव्यक्ति

Amrita Tanmay said...

वाह ! इतना सुन्दर विशेषण .......ईमानदार भ्रष्टचार ... बहुत अच्छी लगी आपकी रचना .. सच !

प्रवीण पाण्डेय said...

सशक्त व स्पष्ट संदेश।

योगेन्द्र मौदगिल said...

बढ़िया...व्यंग्याभिव्यक्ति ........साधुवाद स्वीकारें

डॉ टी एस दराल said...

इमानदार भ्रिष्टाचारी ! हा हा हा ! शायद ऐसे भी होते हैं ।

संजय @ मो सम कौन... said...

ईमानदार भ्रष्टाचारी - ठीक ही तो कहा है।

Arvind Jangid said...

भ्रस्टाचार पर तीखा व्यंग्य, मनोवैज्ञानिक विश्लेषण,
आपका धन्यवाद,

डॉ० चन्द्र प्रकाश राय said...

uday ji bahut hi achhi rachana hai ,karara vyang hai ,badhai

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

ईमानदार भ्रष्टाचारी ...यह भी एक अलग विशेषता है ...अच्छी प्रस्तुति

प्रेम सरोवर said...

YAAR AAPNE TO KAMAL KAR DIYA . aPNE MADHYAM SE SAHI BAT KAH KAR PARDA HI UTHA DIYA.BHRASTACHAR PAR TIKHA AUR NIRMAM PRAHAR KE LIYE AAP DHANYAVAD KE PATRA HAIN.plZ. VISIT MY NEW POST.

vandan gupta said...

सच मे ईमानदार है तभी तो मान रहा है…………सुन्दर कटाक्ष्। बेहतरीन प्रस्तुति।

Rahul Singh said...

किसी ने कहा था, भ्रष्‍टाचार शिष्‍टाचार बन गया है.

पूनम श्रीवास्तव said...

bahut hi sateek abhivykti.bahut hi khoobsurati ke aapne kavita ke saar
ko vishleshit kiya hai.
poonam

प्रवीण said...

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चलो कहीं तो ईमानदारी जिन्दा है... ;)


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मनोज कुमार said...

भ्रष्टाचात भी ईमानदारी से ....!
अच्छी अभिव्यक्ति।

रचना दीक्षित said...

ईमानदार भ्रष्टाचारी हूँ!!!!
इक दम झकास. मज़ा आ गया. करार व्यंग.

Anjana Dayal de Prewitt (Gudia) said...

बेहतरीन प्रस्तुति।

Unknown said...

श्याम जी आपने इस कविता के द्वारा अधिकारिओं में व्याप्त भ्रष्ट नीतिओं को भी ईमानदारी से निभाने के पिछे उनकी मज़बुरिओं का व्यंगात्मक चित्रण प्रस्तुत किया है , जो एक तरफ हमें गुदगुदाता है वहीँ आज के नौकरशाह की आम रवैये को भी दर्शाता है ।