सच ! फिर से मिलने की शर्त पे, हुआ बिछड़ने का करार है
मगर अफसोस 'उदय', वक्त का, कहीं जिक्र तक नहीं है ??"चलो अच्छा हुआ, जो तुम मेरे दर पे नहीं आए / तुम झुकते नहीं, और मैं चौखटें ऊंची कर नही पाता !"
Saturday, June 20, 2015
Monday, May 25, 2015
लू-औ-लपटें ...
पगडंडी भी कच्ची है,
कठिन डगर है ? या फिर …
एक ओर, लू-औ-लपटें हैं,
लाल भी अपने हैं,
क्या डगर पे चलने का इरादा उनका पक्का है ???
औ हाईवे भी कच्चा है,
क्या डगर पे चलने का इरादा उनका पक्का है ?
कठिन डगर है ? या फिर …
पांवों में छालों का डर है ??
एक ओर, लू-औ-लपटें हैं,
एक ओर ठंडे कमरे हैं,
गर नहीं, … हाँ … हूँ … तो फिर …
लाल भी अपने हैं,
माटी भी अपनी है,
पगडंडी भी अपनी, हाईवे भी अपना है, क्या डगर पे चलने का इरादा उनका पक्का है ???
Thursday, May 21, 2015
पक्की-सच्ची ...
चलो लिखें, हम भी लिखें
एक कविता अच्छी लिखें
लूटा-लाटी …
चूमा-चांटी …
बांटा-बांटी …
पक्की लिखें, सच्ची लिखें
पर, चोरी की कुछ न लिखें ?
पक्की लिखें, सच्ची लिखें
पर, चोरी की कुछ न लिखें ?
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सत्यामृत
Wednesday, May 6, 2015
मुहब्बत का हिसाब ...
तस्वीरों की खूबसूरती तो महज इक इत्तफाक है 'उदय'
सच तो ये है कि - उनकी धड़कनों में बसती है कविता ?
…
सच ! वो सवालों पे सवाल दाग देंगे 'उदय'
गर, जुर्रत की, गिरेबां झांकने की तुमने ?
…
चाहें, न चाहें, देख कर तुझको, अदब से हाथ उठ जाता है आदाब को
समझ से परे है दोस्त, हम तेरे दीवाने हैं या तेरे कातिलाना नूर के ?
… …
चाहें, न चाहें, देख कर तुझको, अदब से हाथ उठ जाता है आदाब को
समझ से परे है दोस्त, हम तेरे दीवाने हैं या तेरे कातिलाना नूर के ?
रंज … गम … औ मुहब्बत का हिसाब मत पूछो
कभी हारे … कभी जीते … मगर नुक्सान में हैं ?
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शेर
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