जिन्हें लोग,
आज ...
मचल-मचल के, बाप-बाप कह रहे हैं !
अब तो बस 'उदय'
हमारा ...
इक ... यही टारगेट है !
कि -
अब ...
उनके बाप, ... हमें ... बाप-बाप कहें !!
"चलो अच्छा हुआ, जो तुम मेरे दर पे नहीं आए / तुम झुकते नहीं, और मैं चौखटें ऊंची कर नही पाता !"