Wednesday, June 30, 2010

शेर

.........................................

गुमां है खुद पे, या यकीं है
कि तू 'शेर' है, बेखौफ़ फ़िरता है।

.......................................

Tuesday, June 29, 2010

भोपाल गैस त्रासदी .... एन्डर्सन वनाम मंहगाई !!!

भोपाल गैस त्रासदी .... सन १९८४ भोपाल स्थित यूनियन कार्बाईड आफ़ इंडिया के कारखाने से जहरीली गैस का रिसाव, एक दिल दहला देने वाली घटना कारखाने से रिसने वाली जहरीली गैस जिसने लगभग १५००० महिला, पुरुष, बूढे-बच्चे-जवान, भाई-बहन, माता-पिता, पति-पत्नि न जाने कितने लोगों को मौत के आगोश में ले लिया।

दाण्डिक प्रकरण न्यायालय में चला, फ़ैसला आ गया, फ़ैसले से असंतोष की लहर ... चारों ओर असंतोष राजनैतिक गलियारों, प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रानिक मीडिया, इंटरनेट मीडिया लगभग सभी तरफ़ असंतोष की लहर दिखाई पडी ... त्रासदी, जहरीली गैस, मृतक, वारेन एन्डरसन, एस.पी, कलेक्टर, अर्जुन सिंह, राजीव गांधी, दोष, सजा ... लगभग सभी मुद्दों पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल पडा।

चारों ओर गहमा-गहमी चल रही थी ... तभी अचानक पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस के दामों में वृद्धि ... चारों ओर इस मंहगाई पर हो-हल्ला शोरगुल शुरु हो गया ... मंहगाई के विरोध में आंदोलन, धरना, प्रदर्शन, चक्काजाम, तोड-फ़ोड की घटनाएं ... अचानक ही इस मंहगाई अर्थात कीमतों में वृद्धि के विरोध में सभी के स्वर हो गए।

क्या नजारा है, क्या माजरा है ... कहीं ऎसा तो नहीं एन्डरसन रूपी ज्वलंत मुद्दे को ठंडा करने के लिये दूसरा मंहगाई रूपी मुद्दा ढकेल (उठा) दिया गया है ???

Monday, June 28, 2010

क्या "इंडली" में भी फ़र्जीवाडे की झलक दिख रही है ???

"इंडली" ... एक नया अग्रीगेटर .. पता नहीं कब से चालू है ... अपनी नजर तो कुछेक दिनों से ही पड रही है ... बहुत खुबसूरती से सजाया गया है ... "लोकप्रिय" एक नई और जबरदस्त सिस्टम ... वाह वाह ... वाह वाह ... क्या कहने हैं "इंडली" के ... यहां पर "पसंदीलाल" सक्रिय हैं ... और "ब्लागवाणी" पर "पसंदी और नपसंदीलाल" दोनों सक्रिय रहते थे ... वहां कुछ लोग पोस्ट को उठाने व गिराने के काम में सक्रिय रहते थे ... और यहां पसंदीलाल पोस्ट को ऊपर ही ऊपर उठाने के काम में मशगूल हैं ... मुझे तो यहां भी कुछ फ़र्जीवाडा टाईप का लग रहा है ... भाई जी मैं इन प्रश्नों के उत्तर तलाश रहा हूं मदद करने का कष्ट करें ...

... आखिर फ़र्क क्या रहा दोनों सिस्टम में ???

... पसंदीलाल और नपसंदीलाल कौन होते हैं पोस्ट को ऊपर-नीचे करने वाले ???

... क्या एक आदमी १५ अलग अलग नाम से आई.डी. बनाकर किसी भी पोस्ट को शीर्ष पर नहीं ले जा सकता ???

... इंडली क्या यह सिद्ध करना चाहती है कि उसके एग्रीगेटर पर जो पोस्ट पसंदीलाल लोगों ने पसंद की हैं वह ही श्रेष्ठ पोस्टें हैं ???

... जो पोस्ट पसंद के चटके से ऊपर चढी हुई हैं क्या वे उतनी ऊपर चढने की हकदार हैं ???

.............. जय जय ब्लागिंग !!!!!

Sunday, June 27, 2010

शेर

.......................................

इस भीड में, कहां अपनी 'हस्ती' है
जहां देखो, वहां 'मौका परस्ती' है।

......................................

Saturday, June 26, 2010

ब्लागिंग .... मतलब चमचागिरी !!!

एक ब्लागर मित्र पूछ रहा था भाई साहब ये "ब्लागिंग" क्या है तीन-चार महिने से ब्लागिंग कर रहा हूं पर मुझे आज तक समझ नहीं आया ... चल अच्छा हुआ तुझे ब्लागिंग समझ नहीं आई, तू तो बस लिखता चल ... नहीं भईया बताओ न कुछ खास ... तो सुन ... ब्लागिंग .... मतलब चमचागिरी !!!

... क्यों मजाक कर रहे हो इसमे "चमचागिरी" कहां पर है सब अपना अपना लिखने में मस्त रहते हैं ... बेटा इधर आ और अपना "कान" खुजा के बैठ, बाद में कान "खुजाने" का टाईम नहीं रहेगा, तू सीधा कान पकड के नौंचने लगेगा ... क्यूं डरा रहे हो भईया ... डरा नहीं रहा तुझे सच्चाई बता रहा हूं ...

... सुन चमचागिरी के किस्से ... ब्लाग बनाते और पोस्ट लगाते ही साथ चमचागिरी का पहला कदम ... नामी-गिरामी, फ़िल्मकार, टी.व्ही.कलाकार, न्यूज चैनल के एंकर, पत्रकार, महिला ब्लागर, राजनैतिक ब्लागर ... साथ ही साथ कुछ और धुरंधर टाईप के ब्लागर जिन्होंने "ब्लागिंग गुट" बनाकर रखे हुए हैं ...

... इन लोगों की चमचागिरी शुरु करो ... वो कैसे ... इन सब के "फ़ालोवर" बन जाओ और उनके ब्लाग पर "चमचागिरीनुमा टिप्पणी" ठोकते चलो ... अब ये बता "चेले" किसको पसंद नहीं हैं ... जैसे ही तू इनका चेला बनेगा ... इनमें से कोई न कोई तुझे "पंदौली" देना शुरु कर देगा ... पंदौली मतलब कंधे पर बिठाकर घूमना ... मतलब तेरा "स्टार ब्लागर" बनना तय ... तू २०-२५ पोस्ट लगाकर भी "हीरो" बन जायेगा ...

... और अगर ऎसा नहीं किया तो अपने टाईप का "सामान्य ब्लागर" बन के रह जायेगा ... अगर तू बोलेगा तो बता दूंगा ब्लागजगत में ऎसे कितने "चेले" हैं जो "हिट ब्लागर" हैं ... हां बता दो भईया ... पर मेरे कान में ... मैं सबसे पहले इन "चेले टाईप के गुरुओं" का ही "चेला" बन जाता हूं ...

... पर एक बात और ध्यान में रखना ... यह ब्लागजगत है यहां अदभुत, चमत्कारी, जिंदादिल, शेरदिल, "ब्लागर" भी हैं इनके ब्लाग पर बिलकुल ऎसे ही लोग टिप्पणी करते हैं ... तू भी कभी कभी चला जाया कर नमस्कार करने ... चल जा दूसरा किस्सा बाद में बताऊंगा अभी तो इसी पे अमल कर एक महिने के अंदर तू मेरे ब्लाग से भी आगे निकल जायेगा ... जय जय ब्लागिंग !!!
(निर्मल हास्य)