Saturday, March 14, 2015

दिल-धड़कन ...

लिखते लिखते थक न जाऊँ …
औ अधर्मी न कहलाऊँ …
यही सोच कर चुप बैठा हूँ, 

वर्ना, … 
क्या मंदिर, औ क्या मस्जिद, …
जगह जगह हो कर आया हूँ, 

जब चाहूँ …
तब मैं लिख दूँ … 
हैं मंदिर-मस्जिद … दोनों सूने,

सच तो ये है …
'खुदा' बसा है दिल में मेरे …
और 'राम' बसे धड़कन में … ?

Sunday, March 8, 2015

बधाई व शुभकामनाएँ ....

तू जल -
तू ही अग्नि है,
तू धरा -
तू ही आकाश है,

तू पवन -
तू फूल -
तू ही खुशबू है,

तू जान -
तू जहान -
तू ही जीवन है,

तू स्त्री -
तो मैं पुरुष हूँ
तू नहीं -
तो मैं कुछ भी नहीं हूँ !

~ श्याम कोरी 'उदय'

Thursday, March 5, 2015

हैप्पी होली …

सभी मित्रों को … रंगों के पर्व की ... हार्दिक बधाई व शुभकामनाएँ ....
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हैप्पी होली …