"चलो अच्छा हुआ, जो तुम मेरे दर पे नहीं आए / तुम झुकते नहीं, और मैं चौखटें ऊंची कर नही पाता !"
Wednesday, January 21, 2015
Friday, January 9, 2015
लाजवाब ...
खून-औ-स्याही की कद्र करो
अभी खूब इंकलाब बाकी हैं ?
लफ्फाजियों का दौर है 'उदय', लफ्फाजियों की बस्ती है
क्या तिगड्डा, क्या चौगड्डा, क्या गली, क्या चौबारा ?
…
कसम उनकी भी लाजवाब है 'उदय'
तड़फ-तड़फ के मर जायेंगे पर हमें न पुकारेंगे ?
…
( मित्रो, आजकल मैं इस ब्लॉग पर भी उपस्थित हूँ … आप सभी का सादर स्वागत है …
http://shyamkoriuday.blogspot.in/ .
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Thursday, January 1, 2015
नया साल
चलो. बढ़ें, गढ़ें …
कुछ नया ....... नये साल में,
जीवन की आपा-धापी से
चुनें … कुछ लम्हें … नये साल में
दें आकार उन्हें … हम सदियों-सा,
कुछ करें, कुछ ऐसा कर जायें
पदचिन्ह हमारे …
युगों-युगों तक रह जायें,
चलो, बढ़ें, गढ़ें …
कुछ नया ....... नये साल में !चलो, बढ़ें, गढ़ें …
Monday, December 29, 2014
नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ …
बस, … इस साल के
एक-दो सुट्टे … बचे हैं दोस्त
दम लगा के …
खैंच लो,
खैंच लो,
फिर ? … फिर क्या … !!
नया साल सुलगने लगेगा…?Saturday, December 20, 2014
औघड़-फक्कड़ ...
चलो निपट गया
एक……… और कुंभ
कुछेक स्वयम्भुओं … एक……… और कुंभ
को पुण्य मिल गया ?
…
आज, तमाम अपराधी संदेही हैं, या फरार हैं
अब और, ………… हम क्या कहें 'उदय' ?
…
सच ! न टोपी, न टीका, न माला, न टोटके
हम कैसे मान लें 'उदय', कि तुम ज्ञानी हो ?
....
क़ुबूल हों तुम्हें …
तमगे, दुशाले औ समारोहों की चका-चौंध
तमगे, दुशाले औ समारोहों की चका-चौंध
हम ! …… हम तो ठहरे औघड़-फक्कड़ ?
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