Tuesday, December 16, 2014

कुचल दें ...

कोमल पंखुड़ियाँ मसल दी हैं
कल …
कुछ जालिमों ने,


तब से अब तक
रोम तक कंप-कंपा रहे हैं मेरे,

करूँ तो क्या करूँ …
मैं अकेला हूँ,

चलो मिलकर …
कुचल दें
हुकूमत जालिमों-जल्लादों की ?

Monday, December 8, 2014

हौले हौले

उनके, रंज-औ-गम दोनों फर्जी हैं
सच ! वो बहुत बड़े नकलची हैं ?
… 
सच ! चित्त भी उनकी है, औ पट्ट भी उनकी
बस, खड़े सिक्के पे उनका जोर नहीं चलता ?
.... 
गर जिंदगी शराब है, तो तू मैकदा है
बता, छक कर पियें, या हौले हौले ?
…
हाईकू
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जो तू कहे …
ओढ़ लूँ, 
या बिछा लूँ ?

Tuesday, December 2, 2014

माजरा ...

'खुदा' की कसम, वो बड़े जल्लाद हैं
रहम पाकर भी, ..... मस्ता रहे हैं ?
… 

कुछ इस तरह का माजरा है 'उदय'
शक्ल भेड़िये-सी है, पर उसे बाघ बता रहे हैं लोग ?
.... 
मुफलिसी के किस्से भी बड़े अजीब हैं
वो कहते हैं, कि हम तुमसे अमीर हैं ?
… 

सच ! तूने, होंठों से छूकर मुझे डायमंड बना दिया 
वर्ना जिंदगी किसी पत्थर से कम नहीं थी अपनी ? 
…
हम तो तुम्हें चाहते ही रहेंगे
बस तुम, …
जी को मचलने मत देना ?? 
…