वे ... कभी अराजकता की,
तो कभी …
असंवैधानिकता की दुहाई देते हैं
सीधे तौर पे
सब
क्यूँ कह नहीं देते
कि -
हम भ्रष्टाचार के हिमायती हैं ?
"चलो अच्छा हुआ, जो तुम मेरे दर पे नहीं आए / तुम झुकते नहीं, और मैं चौखटें ऊंची कर नही पाता !"