सच ! उम्र संबंधों की 'उदय', सोलह रहे या अठारह
होना वही है, जो अक्सर नादानियों में हो जाता है ?
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गर, तुमसे पहले भी,....................हमें किसी से प्यार हुआ होता
तो शायद आज हम, मुहब्बती रश्मों-रिवाजों से अनजान नहीं होते ?
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आतंकियों की मौत पे, सहानुभूति अच्छी नहीं यारा
वर्ना, पाक दामन भी.................दागदार समझो ?
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सच ! वे खुद को, पीर, मौला, हकीम, कहते हैं 'उदय'
पर, बगैर तमंच्ची घेरों के, घर से बाहर नहीं आते ?
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उफ़ ! कहाँ तुम, उस एक अदने से 'कोहिनूर' के पीछे पड़े हो
यहाँ तो, विजय, सुब्रत, जैसे सैकड़ों कोहिनूर बिखरे पड़े हैं ?
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