Saturday, March 9, 2013

हाय-तौबा ...


लो, मुहब्बत हुई भी तो उनसे हुई 
जिन्ने, पहले से ही अपनी सुपाड़ी ले रखी थी ? 
... 
जो बेसहारों के सहारे होने का दम भर रहे हैं 'उदय' 
वो तो खुद ही, किसी न किसी के......सहारे पे हैं ? 
... 
आओ, चलें.........कुछ जज्बात बेच दें हम भी 
वैसे भी, हमें कौन-सा मुरब्बा बनाना है उनका 
... 
न्याय की कहाँ दरकार थी उन्हें 
वे तो, मुआवजे के लिए हाय-तौबा मचा रहे थे 'उदय' ? 
... 

Thursday, March 7, 2013

तरकीब ...


कुछ गरीबों का पेट,....भर देता,..... बचा रात का भोजन 
मगर अफसोस, उनकी नाफरमानियों ने बुसा दिया उसे ?
... 
जलाये रक्खो खुद को, राहों में बहुत अंधेरा है 
न जाने किस के, ये उजाले काम आ जाएँ ??
...   
लो, मिला है मौक़ा उन्हें, उंगली उठाने का, मेरे किरदार पे
जिन्ने,.....दलाली, बेईमानी से, खुद को तराशा है 'उदय' 
... 
वैसे तो, चित्त भी उनकी है...औ पट्ट भी उनकी 
बस, सनसनी के लिए, वो सिक्का उछालते हैं ? 
... 
सच ! वो नसीब से नहीं, तरकीब से जीते हैं 
वर्ना, तीन बादशे अपने, पिटते नहीं 'उदय' ?


Wednesday, March 6, 2013

लालसा ...


सच ! गर तेरी खामोशियों को पढ़ना, हमने सीखा नहीं होता 
तो शायद, तेरी चाहतों से अब तलक,..हम अंजान ही रहते ?
... 
आज, जिसे देखो वही जल्दी में है 
तनिक जल्दी....हमें दे दो 'उदय' ?
... 
रात के किसी भी पहर, ठिकाना बदल लेते हैं हम 
अब, कमजोर चारदीवारियों पे...भरोसा नहीं रहा ?
... 
सच ! लिखने के शौक से लिख लेते हैं हम 'उदय' 
वर्ना, छपने की लालसा कभी जेहन में नहीं रही ?
... 
लौंडे किये हैं पैदा, कमाल के उन्ने 
न घर के दिखे हैं, और न घाट के ? 

Monday, March 4, 2013

जज्बातों के सौदे ...


अब तुम, ये किस जिद में हो, हमें जाने दो 
कहीं ऐंसा न हो, तुम...........तुम न रहो ? 
... 
सच ही है 'उदय', हर एक आदमी में हैं दस-बीस आदमी 
बस, टटोलोगे, तो सब.......एक-एक कर मिल जायेंगे ?
... 
हमारे अल्फाज 'उदय', हमारे किसी काम के नहीं लगते 
पर, कोई चाहे तो, सहारे उनके......पार कर ले दरिया ?
... 
खरीद-फरोख्त के दौर में भी, पिछड़ गए हैं हम 
जज्बातों के सौदे, हम से मुमकिन नहीं ठहरे ? 

Saturday, March 2, 2013

फुर्सत से ...


हमें राख समझ के वो घड़ी-घड़ी छेड़ रहे थे 'उदय' 
जला जो हाँथ तो गलतफहमियाँ दूर हुईं उनकी ? 
... 
बहुत तडफेंगे वो, अब इस मुलाक़ात के बाद 
क्यों ? ...
क्योंकि -
अब हमारा लौटना मुमकिन नहीं लगता ??
... 
हमने तो उन्हें, जब भी देखा है, रंग-बिरंगे दुपट्टों में ढका देखा है 
पर ऐंसा सुनते हैं 'उदय', फुर्सत से...........तराशा गया है उन्हें ?
... 
क्यूँ न, खुशी और गम के बीच 
हम,......... इक पुल बना लें ? 
... 
'टोपीबाजी' के हुनर में तो वे जन्मजात माहिर हैं 'उदय' 
पर आज उन्नें, ............ 'हैट' ही पहना दिया सबको ?