भृष्टाचारियों, तुम खुद ही तुम्हारी हदें तय कर दो
ताकी, उसके बाद ही, हम तुम्हारे ... गिरेबां पकड़ें ?
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तमाम सबूतों और गवाहियों के बाद भी, गुनहगारों की अकड़ कायम है
लंगड़े, लूले, गूंगे, बहरे .... अब, न्याय की चाह में जाएँ तो जाएँ कहाँ ?
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न तो शर्म है उन्हें, और न ही वे बेक़सूर हैं 'उदय'
बस, सत्ता का कवच है, ..... सही-सलामत हैं ?
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क्या खूब, आज उन्ने, खुद ही खुद को, बेक़सूर सिद्ध किया है 'उदय'
लगता नहीं कि अब ... अदालतों व जाँच एजेंसियों की जरुरत होगी ?
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दो-एक तस्वीरें, रसीदें व आयोजनों के झूठे-सच्चे आंकड़े
उफ़ ! ये, खुद की नजर में, खुद की बेगुनाही के सबूत हैं ?