Sunday, September 30, 2012

नौटंकी ...

अब इनसे तो 'उदय', कोई नंगा ही जीत सकता है 
शंका है हमें, कहीं 'खुदा' भी न हार गया हो इनसे ? 
... 
दो-चार दांव-पेंच सीखने में हर्ज ही क्या है 'उदय' 
सुनते हैं, वही तो चमकते भाव हैं साहित्य के ??
... 
लोग खामों-खां इल्जाम लगा रहे हैं, कि - हमने छेड़ा है उन्हें 
पर, ......... हकीकत तो ये है, कि - हमें छेड़ा गया है 'उदय' ? 
... 
क्या गजब नौटंकी देखने को मिलती है अपने मुल्क में 'उदय' 
उफ़ ! अर्थी सजाने की घड़ी में, सेहरा सज रहा भृष्टाचार का ?
... 
उनकी शर्तें पढ़-पढ़ के हम हैरान हैं 'उदय' 
लगता नहीं, कि - हम कभी छप पाएंगे ?

Saturday, September 29, 2012

जागीर ...

हमने तो सुना था, 
कि - 
सिर्फ ..... सरकार उनकी है ?
पर, 
यहाँ तो -
सारा मुल्क ... 
उनके ...
बाप की -
जागीर हमको लग रहा है ??

Friday, September 28, 2012

पैमाना ...

तू आ, या ना आ, हमें क्या !
वैसे भी, हमें नींद ... अब आती नहीं है ? 
... 
गर, सर टेकना जरुरी था, किसी दरगाह में टेक लेते  
कम से कम गद्दारों का हौसला आफजाई तो न करते ?
... 
न जाने ये किसकी नजर लगी है मेरे मुल्क पे 'उदय' 
चवन्नी-अठन्नी की तरह, लुप्त हो रहा ईमान है ??
... 
जी तो चाहता है हमारा भी समेट लें धन-दौलत 
पर, बेईमानी के लिए दिल हामी नहीं भरता ??
... 
काश ! बिचौलियेपन का भी ... कोई पैमाना होता 'उदय' 
तो शायद, मंत्री, मुमंत्री, प्रमंत्री, रेस में आगे नहीं होते ?