"चलो अच्छा हुआ, जो तुम मेरे दर पे नहीं आए / तुम झुकते नहीं, और मैं चौखटें ऊंची कर नही पाता !"
Thursday, September 27, 2012
Wednesday, September 26, 2012
Tuesday, September 25, 2012
Sunday, September 23, 2012
चित्तम चित्त ...
काश ! होता मुमकिन, आईने में सीरतें नजर आना
तो सूरतों से 'उदय', कब का भरोसा उठ गया होता ?
...
ज़ुबानी जंग लड़ लड़ के, मिली है सल्तनत उनको
अगर कुश्ती लड़ी उन्ने, तो वो हार जाएंगे ?????
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सरकार ........................ गिरे, न गिरे
पर, कुछ गिरे-गिरायों की भरपूर धूम है ?
...
मंहगाई रूपी पटकनी से, चित्तम चित्त है जनता
मगर अफसोस, कुछ शैतां ..... अब भी मजे में हैं ?
...
कोई ऑक्सीजन, तो कोई ग्लूकोज हुआ है
लग रहा है, शैतां ..... अमर हो जाएगा ??
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शेर
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