Sunday, March 23, 2014

संशय ...

खुद को मुकद्दर का सिकंदर मत समझ 
हवाओं का रुख भी तो तनिक देख ले ? 
… 
'उदय' ये कैसी लहर है, कैसी हवा है उनके नाम की 
न सिर्फ वे, वरन उनके हमकदम भी हैं संशय में ? 
… 
जबकि, पूरा ध्यान उनका लिपस्टिक-पॉवडर पे था 
फिर भी उन्ने 'उदय', है लिक्खी क्या खूब कविता ? 
… 
काश ! हमारे पास भी होते करोड़ रुपये 'उदय' 
तो आज, हम भी, उनकी पार्टी के नेता होते ?
… 
जब मानना ही था, तो रूठे क्यूँ थे 
उन्ने, हठ को तमाशा बना दिया ?
… 

Saturday, March 22, 2014

समय और कुल्हाड़ी ...

समय, सिर्फ इतना बदला है 'उदय' 
कि -
पहले लोग … 
पाँव पे कुल्हाड़ी मारते थे, 
और अब … 
पाँव कुल्हाड़ी पे मारने लगे हैं ????

Thursday, March 20, 2014

मुहब्बत ...

जब से, उनकी तारीफ़ का जिम्मा, उन्ने लिया है 
ठीक तब से, उनमें उन्हें, भगवान नजर आते हैं ? 
… 
पत्थरों को कोई पत्थर कह के न पुकारे 'उदय' 
वे खुद कह रहे हैं, … उनके लोग कह रहे हैं ? 
… 
'आम आदमी' न तो कभी मरा है, और न ही कभी मरेगा 
चिंता तो, आज हमें भी है 'उदय', कुछेक 'ख़ास' लोगों की ? 
… 
उन्हीं से मुहब्बत, और उन्हीं से तकरार 
ए दिल, बता आखिर तू चाहता क्या है ?
…  
उफ़ ! उनकी ढलती उम्र पे तो कोई तरस खाये
बस, उन्हें एक आख़िरी मौक़ा और मिल जाये ?
… 
झूठी पत्तलों को भी, चाटने से, वो बाज नहीं आ रहे हैं 
सत्ता में बने रहने के लिए दर दर भटक रहे हैं आज ? 

Tuesday, March 18, 2014

जुर्म ...

हम तो थक गए 'उदय', उन्हें अपनी बुराइयां बता-बता के 
फिर भी, न जाने क्यूँ उन्हें, हम पे एतबार अब भी है ???
… 
सबूत दो, गवाही दो, … 
वर्ना, चोर को चोर कहना भी जुर्म है 'उदय' ? 
… 
खौफ, दहशत, जिन्दगी, मौत, सन्नाटा, सुरक्षा, आश्वासन  
नक्सल … … … … … बनाम … … … … … सरकारें ?
… 
सच ! राजनीति का जो हाल है, वो है तो है 'उदय'
मगर अफसोस, पत्रकारिता की भी वही चाल है ? 
उनकी उचक्काई के किस्से सरेआम हैं 'उदय' 
फिर भी, वो कहते हैं, कि, वो चौथे चक्के हैं ?

Saturday, March 15, 2014

सर्कस ...

ये कैसा सर्कस है 'उदय', 
जहां -
गधे, 
घोड़े, 
खच्चर, 
चूहे, 
बिल्ली, 
गिरगिट, 
कबरबिज्जू, 
सियार, 
लोमड़ी … 
सब मिलजुल कर 
एक साथ 
करतब दिखाने की फिराक में हैं ?
और तो और 
उनके ही चेले-चपाटे 
पहले से ही 
दर्शकदीर्घा से 
वाह-वाह … वाह-वाह … 
बहुत खूब … बहुत खूब … 
के नारे … ... ... लगा रहे हैं ??