Sunday, September 8, 2013

मौसेरे भाई ...

दुःख इस बात का है 'उदय' 
कि - 
अब भी 
वो सुधरने को तैयार नहीं हैं, 
और फिर भी 
न जाने कितने 
उन्हीं पे, उन्हीं लोगों पे 
आस लगाए हैं 
उन्हें ही, तक रहे हैं 
जबकि -
सब जानते हैं 
वे चोर-चोर मौसेरे भाई हैं ?

Saturday, September 7, 2013

स्वभाव ...

लहर का स्वभाव है
गिरना, उठना, बहना, बहा ले जाना
दूर, बहुत दूर, … बहुत दूर
 
फिर लौटना, लौट कर आना
उमड़ना, घुमड़ना …
और फिर, फिर से 
अपने स्वभाव में आ जाना ?

Thursday, September 5, 2013

यार जुलाहे ...

छोटी-छोटी बातों पे भी 
हमने देखा … अड़ते तुझको, 

रोते तुझको, लड़ते तुझको, भिड़ते तुझको 
हार गया, पर हार न मानी, 

हो उद्दण्ड जीत की ठानी 
ठानी तो बस ठानी-ठानी, हार न मानी, 

क्यों बुनता, क्यों रचता है तू … यार जुलाहे 
हर पल, … हर क्षण, … ऐसी कहानी … ?

Wednesday, September 4, 2013

परिवर्तन ...

01 

तू अपनी खुबसूरती पे
इत्ता नाज न कर,
गर तू कहे
तो कुछ कहूँ मैं,
वर्ना,
दिल दुखाना
हमें भी
अच्छा नहीं लगता ??
…  
02

अभी तक तो
हम ढूँढ रहे थे भीड़ में खुद को
अब-जब
तुम कहते हो,  
तो चलो
हम …
ढूंढ लेते हैं खुदी में खुद को ?

03

यदि राजनीति में
अच्छे-सच्चे लोग नहीं आयेंगे,
तो कोई बताएगा
व्यवस्था कैसे बदलेगी ?
व्यवस्था परिवर्तन के लिए
क्या हम, यूँ ही
दम भरते रहेंगे
चीखते-चिल्लाते रहेंगे ???
...

Sunday, September 1, 2013

कमिटमेंट ...

अपराधी, पुलिस, सरकार, तीनों हैं संशय में यारो
सच ! अब 'खुदा' ही जाने कौन किस्से डर रहा है ?

अब तो सिर्फ … आसा-औ-राम … का है भरोसा
वर्ना, जेल की कालकोठरी में, घुटेगा दम उसका ?

दान, दया, दवा, दारु, औ दर्द की दुकां है उनकी
वोट भी उनका है और है सरकार भी उनकी ??

आज जिनकी जुबां पे, छिलने के निशान नहीं हैं 'उदय'
हम कैसे मान लें, उन्ने कभी इंकलाबी नारे लगाये हैं ?

अब तुम, उनकी मजबूरी भी तो तनिक समझो यारो
सच ! वे दुम हिलाने का कमिटमेंट कर चुके हैं पहले ?