Saturday, April 6, 2013

हिचकियाँ ...


उनकी तरह, उनका भी हक़ है हमें आजमाने का 
कोई तो होगा, ............ जो उधेड़ लेगा हमको ? 
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वो इक बार कह तो दें, कि - दंगाइयों संग रिश्ता-नाता है 
तो फिर, हमारी बस्तियाँ ............. हम खुद जला देंगे ? 
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लो, भरी दोपहर में, घोर अन्धेरा छा गया 
उफ़ ! मुहब्बत उनकी, दगाबाज निकली ? 
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तुम्हारी हिचकियाँ बयाँ कर रही हैं हाजिरी मेरी 
बस इतना तो बता दो, कब हम जुबाँ पे होंगे ?
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सच ! कभी टेड़ी तो कभी सीधी, खुद-ब-खुद हो जाती है 
ऐंसा सुनते हैं 'उदय', बहुत 'मुलायम' है दुम उनकी ??
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Thursday, April 4, 2013

फ़रिश्ते ...


तनिक जोर-आजमाईश तुम भी कर लो, 
फिर देखें, बनाते हो या बनते हो एप्रिल-फूल खुद यारा 
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वो इतने भी मुलायम नहीं हैं 'उदय', कि - दबाने से दब जाएँ 
पर, गर, खुद उनकी ही मंसा हो, तो फिर हम क्या कहें ???
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आज हमारी मुहब्बत का इम्तिहान है 'उदय' 
चुप रहो, ये पैगाम भेजा है उन्ने ???????
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ऐंसा सुनते हैं 'उदय', जो दिखता है वही बिकता है 
तो फिर, दुनिया ये समझ ले, हमें बिकना नहीं है ?
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एक तो, वो बगैर सहारे के खड़े हो नहीं पाते 
फिर भी, फ़रिश्ते कह रहे हैं खुद को वो ???
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Monday, April 1, 2013

हुजूर ...


हद है ! अनशन को उपवास बता रही है मीडिया 
अब इसे,.....क्यूँ न हम उनकी बेशर्मी समझें ?
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ये दोस्ती का ही तो असर है शायद, कि -
हम नजर में हैं, औ नजर से दूर भी हैं ?
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सच ! अब हम, किसको सुबह, औ किसको शाम कहें 
मुहब्बत में, हर घड़ी नवतपे सी लपटें उठा करती हैं ? 
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दुनियादारी का हुनर कोई उनसे सीखे 'उदय' 
चवन्नी छाप होके भी सरकार बने बैठे हैं ? 
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एक अर्से के बाद नजर आये हैं हुजूर 
शायद हमसे ही कोई खता हुई होगी ?
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Friday, March 29, 2013

दगाबाज ...


न तो तुम चैन से मिलते हो, औ न मिलने देते हो 
इस कदर बेचैनी का, ..........हम सबब तो जानें ?
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लो, एक तो वो खुद ही, पंदौली दे रहे सरकार को 
और हमसे कहते हैं, कि -........दगाबाज हैं वो ?
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कभी टेड़ी, तो कभी सीधी, खुद-ब-खुद हो जाती है 
उफ़ ! बहुत 'मुलायम' है................दुम उनकी ?
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हमने तो 'उदय', उनके दिल को सहलाया भी था, औ बहलाया भी था 
मगर, फिर भी ...................................... वो दगाबाज निकला ?
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अब इसमें दोष उनका तनिक भी नहीं है 'उदय' 
दरअसल, खरीददार ही बड़ा हुनरमंद निकला ?
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Wednesday, March 27, 2013

शर्म का पर्दा ...


वैसे तो, आज का हर आदमी, कवि है, कलाकार है 
बस, नहीं है तो,......एक अच्छा दुकानदार नहीं है ? 
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उनकी सिसकियाँ थमने का नाम नहीं ले रही हैं 'उदय' 
अब 'रब' ही जाने, कैसा जलजला आया है उन पर ??
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उनका भी अंदाज, कुछ अजब, कुछ गजब, कुछ निराला है 
खुद को ही,............................ खुद बधाई दे रहे हैं वो ? 
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कश्मकश, सपने, महकती रातें, और वो बेबाक लिपटना तेरा 
गर हम चाहें भी तो, कैसे...................भूल जायें वो मंजर ?
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मैंने तो 'उदय', सिर्फ आँख से शर्म का पर्दा हटाया है 
यहाँ तो लोग हैं, जो जिस्म भी खुल्ला ही रखते हैं ? 
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