Wednesday, October 10, 2012

लल्लो-चप्पो ...

गुनाह करके 'उदय', उन्ने ... हमसे सबूत मांगे हैं 
अब हम  क्या कहें, वैसे .... फैसले भी उनके हैं ?
... 
उनकी बला, उन्ने अपने सिर पे ले ली 'उदय' 
अब 'खुदा' ही जाने, ... उनका हश्र क्या होगा ? 
... 
ए दोस्त, तुम कितने सच्चे, कितने झूठे हो, ये तो तुम ही जाने हो 
पर, गर ये मजाक है, तो भी  .......................... तुम्हें सलाम !
... 
ऊँचाईयों का खौफ, ये ... किसे दिखा रहे हैं 'उदय' 
हम परिंदे हैं, आसमानों में ही है, बसेरा अपना ? 
... 
लल्लो-चप्पो के हुनर से, वे सत्ता के सरताज हैं 'उदय' 
वर्ना, उनकी काबलियत ... चपरासी से ज्यादा नहीं है ? 

Tuesday, October 9, 2012

कवि और कविताएँ ...


क्यूँ 'उदय', ... तुम - 
कविताओं में कवि ढूंढ रहे हो ? 

या फिर -
कवियों में कविताएँ ??

या फिर -
खुद को दे रहे हो तसल्ली ... 
कि - 
अभी नहीं तो कुछ देर बाद ... 
आज नहीं तो कल ... 

कभी न कभी ... 
मिल ही जाएंगे ...
आज के दौर में भी ... 
पुराने दौर जैसे -

खून खौला देने वाले - 
रौंगटे खड़े कर देने वाले 
कवि -
और कविताएँ ??? 

तमगों की चाह ...


देर-सबेर, सब दूध-का-दूध और पानी-का-पानी हो जाएगा 
लोग, खामों-खाँ ... सच्चाई से बचने की जुगत ढूंढ रहे हैं ?
... 
अब क्या कहें, अपने मिजाज उनसे मिलते नहीं 'उदय' 
वर्ना, तकरार की ..... आज कोई गुंजाइश नहीं होती ? 
... 
ऐंसा लगता है 'उदय', उनकी बत्ती गुल हो जायेगी 
गर, बिजली की कीमतों पे अंकुश न लगाया उन्ने ? 
... 
ये पोंगा-पंडितों का युग है 'उदय', जहां वे जन्मे हैं 
वर्ना, उनकी भी ........ आज जय-जयकार होती ?
... 
हमें, किसी की भी, चमचागिरी औ जी-हुजूरी की जरुरत नहीं है 'उदय' 
क्यों ? .................. क्योंकि, हमें बनावटी तमगों की चाह नहीं है ??

Monday, October 8, 2012

स्क्रिप्ट ...


साहब, मैं आपको खरीदना चाहता हूँ !
क्यों ? 
मुझे आपकी जरुरत है ... 
किसलिये ??
मुझे एक बहुत बड़ा घोटाला करना है !!
करो, वहां मेरा क्या काम ???
साहब, आप एक बहुत बड़े लेखक हैं ...
आप से -
महाघोटाले की ... 
और उसके बाद, ... उससे ...
बच निकलने की, एक - 
सुपर-डुपर हिट स्क्रिप्ट लिखवानी है !!!

Sunday, October 7, 2012

गारंटी ...


दौलतें सब की 'उदय', यहीं छूट जानी हैं 
लोग, खामों-खाँ उछल-कूद कर रहे हैं ? 
... 
खिड़की, चौखट, आँगन, ... सब सूने-सूने-सूने हैं 
उनके ............................. चले जाने के बाद ? 
... 
देर-सबेर ही सही 'उदय', इक दिन वो पल आएगा 
कुकुर-बिलई के चंगुल से, देश मुक्त हो जाएगा ?
... 
वो हमसे परसों की गारंटी ले के गए थे 'उदय' 
लो, वो खुद ही .......... आज शाम चल बसे ? 
... 
वो मर्जी के मालिक हैं, हमें संगदिल कह सकते हैं 
मन ही मन चाहते रहना, गुनाह तो नहीं है 'उदय' ?