Thursday, October 4, 2012

प्रतिभाओं की कमी नहीं ...


ज्योतिपर्व प्रकाशन से रश्मि प्रभा जी के सम्पादन में प्रकाशित यह पुस्तक ब्लॉग लेखकों पर आधारित है ... जिसमें आज के दौर के अधिकाँश चर्चित ब्लॉग लेखकों की लेखनी के सांथ-सांथ मेरी लेखनी के अंश भी मौजूद हैं ... यह एक बेहद प्रभावशाली व प्रसंशनीय पुस्तक है जो वर्ष - २०११ की चुनिन्दा "ब्लॉग पोस्ट्स" का संग्रह है, अवश्य पढ़ें ... आभार !

निम्न ई-मेल पर संपर्क कर पुस्तक प्राप्त कर सकते हैं - 
rasprabha@gmail.com

रैफरी ...


सुनहरा मौक़ा है, आज उनके हांथों में 
गिरा लें ... 
लड़ लें ... 
बना लें  ...
सरकार ? 
मगर भूलें नहीं, ... कि - 
वे भी हैं सरकार !
दांव-पेंच ...
धोबी-पछाड़ के 
वे भी हैं ... फनकार !!
और तो और, उनके पास ... 
सत्ता रूपी ... बोनस पाइंट भी है ?? 
और ये भी न भूलें, ... कि - 
'रैफरी' भी तो ... उनका है सरकार ???

Wednesday, October 3, 2012

हुनर ...


जैसे पहले डूबी थी, वैसे ही इस बार भी डूबेगी लुटिया उनकी
फिर भले चाहे ...... वो कड़क हों, ......... या मुलायम हों ?
... 
उन्हें तो गुमान है 'उदय', सिर्फ ...... अपनी चतुराई पे 
और एक हम हैं, जो उनकी लेखनी में हुनर ढूंढ रहे हैं ?
... 
उन्होंने तय कर लिया है, कि हमें लिखना नहीं आता 
जब नहीं आता, तो क्या कहें, समझ लो नहीं आता ? 
... 
तमाम हो-हल्लों और घोटालों के बाद भी धूम है उनकी 
ये लोकतंत्र है, ..................... या भृष्टतंत्र है 'उदय' ? 
... 
लो, ढोंग से भरा चेहरा उसका, क्या खूब चम-चमाया है
क़त्ल का इल्जाम, जो उसने, किसी और पे लगाया है ? 

Tuesday, October 2, 2012

प्रतिक्रिया ...

उन्हें करने दो सितम, आज तो हम सह लेंगे 
पर अब, किसी गद्दार को, वोट हम नहीं देंगे ?
...
जब राजनैतिक भौं-भौं से परहेज है तुम्हें 
फिर, मंच पे दुम क्यूँ हिला रहे हो मियाँ ? 
... 
छपी है कविता पत्रिका में, और उन्हें फेसबुक पे प्रतिक्रिया की चाह है 
'उदय' कोई समझाए हमें, ... हम दें ... प्रतिक्रिया ... तो कहाँ दें ???
... 
उन्हें तो, हक़ है टिप्पणी का, भले भद्दी ही सही 
तुम औ हम कौन होते हैं उन्हें मना करने वाले ?
... 
सिर्फ नारी नहीं, वे तो सारे देश पे भारी हैं 
सर हैं, ... सरकार हैं, ... असरदार हैं वो ?