Wednesday, September 5, 2012

ख्वाबी मंसूबे ...

बेवफाई का इल्जाम, ..... तुम यूँ न लगाओ यारो 
खामोशियों की वजह, कुछ और भी हो सकती है ? 
... 
शायद, अब हम नहीं मिल पाएंगे तुमसे 
दरमियाँ हमने, इक लकीर खींच दी है ? 
... 
अब तो बाज आ जाओ ख्वाबी मंसूबों से 
कहीं, दो गज जमीं के लाले न पड़ जाएं ? 
... 
उस बूढ़े का तुम इम्तिहां न लो, कहीं गिर न जाए 
ढेरों लोगों ने मिल के, खडा रक्खा है उसको ???
... 
कोई समझाए उन्हें, कि वो शायर नहीं हैं, सरपंच हैं 
गर, सरपंची बयां करते, तो हम भी उन्हें दाद देते ?

Tuesday, September 4, 2012

शर्त ...

अब तक, छल-कपट-औ-दांव-पेंच से, जीती उन्ने लड़ाई है 
पर अब, चारों खाने चित्त होने की, उनकी नौबत आई है ? 
... 
सच ! अब इसमें रंज कैसा, मुहब्बत हमने की है 
कहीं दिल को लगी है, तो कहीं दिल को चुभी है !!
... 
जमीं पे, पांव भर जगह नहीं दी किसी जालिम ने 'उदय' 
अब हमारे इल्म के परिंदे आसमां में उड़ रहे हैं ? 
... 
गर, उठने की कोई शर्त है तो बयां करो, हम पूरा करें 
सच ! तुम्हारे हाँथ की चाय की आदत पड़ चुकी है ? 
... 
तनिक सा फासला तो तुम, तय कर नहीं पाए 
न जाने कैसे होंगे वो, जो सितारे तोड़ते होंगे ? 

Monday, September 3, 2012

ईश्वर ...

जब हमें यकीन है, कि - 
ईश्वर है !
तो फिर ... 
यह संशय क्यूँ है, कि - 
हरेक इंसान का अपना-अपना -
एक अलग ईश्वर होगा ? 
बोलो ... 
क्यों ? किसलिए ?? 
जबकि सच्चाई यह है, कि - 
ईश्वर एक है !
सबका मालिक एक है !!

Sunday, September 2, 2012

आत्मविश्वास ...

शिखर पर पहुंचने के लिए 
न जात की जरुरत है, 
न धर्म की !
वहां तो हमें 
सिर्फ 
हमारा आत्मविश्वास -
ले जा सकता है 
पहुंचा सकता है !!

Saturday, September 1, 2012

सफलता ...

जब हम -
कदम ही नहीं बढ़ाएंगे ... 
तो मंजिल पर पहुंचेंगे कैसे ? 
चलो ... उठो ... बढ़ो ... 
कदम बढाएं, बढाते जाएं ... 
सफलता -
हमारी राह तक रही है ... !!