Tuesday, January 3, 2012

शोर ...

शोर
हुआ था बहुत
कान
फटने लगे थे !
मातम का है
या चाहे
जैसा भी सन्नाटा है
रहने दो
कुछ घड़ी इसे तुम
रहने दो !!

... हमारा हक़ तो बनता है !

उम्मीदों के चिराग न बुझने देना 'उदय'
सच ! गुप्प अंधेरों से भी गुजर जाएंगे !!
...
सच ! तेरे इकरार की, इतनी भी जल्दी नहीं है
खुशी इस बात की है, तूने मुस्कुराया तो सही !
...
सच ! तूफानों के रुख से लड़ना, तूफानों से भिड़ना है
इतना आसां नहीं है फिर भी, लड़ते लड़ते बढ़ना है !!
...
भ्रष्टाचार कुछ "ले - दे" कर, ख़त्म तो हो जाएगा
लेकिन, मौक़ा मिलते ही फिर से जवां हो जाएगा !
...
कौन कहता है कि दिन भर मिलते रहो हमसे
पर दो-चार पल पे, हमारा हक़ तो बनता है !!

... किसी की जान नहीं लेगी !!

जिंदगी में कुछ हो या न हो, पर रुपया-पैसा जरुरी है
क्यों ? क्योंकि, बगैर उसके थम सी जाती है जिंदगी !
...
कह तो रहे हैं लोग, इस शहर का नहीं हूँ मैं
कैसे करूँ यकीं, कि इस शहर का नहीं हूँ मैं !
...
उम्र का हर मोड निराला, कुछ खोना - कुछ पाना है
क्या खोया ये छोडो पीछे, क्या पाना तय करना है !
...
कौन, कब, किस नाम से मिल जाए, ये कौन जाने है ?
ये फेसबुकिया दुनिया है यारो, यहाँ सब के ठिकाने हैं !!
...
लोग कुछ भी कहें, पर उतनी भी कडुवी नहीं है जुबां मेरी
सच ! चुभ तो जायेगी लेकिन किसी की जान नहीं लेगी !!

Monday, January 2, 2012

नया साल ...

ठीक है, तू आ तो गया है, अपनी मर्जी से
पर, अब तुझे जाना होगा, मेरी मर्जी से !
नया साल है तो क्या हुआ ?
बना रहे !!
पर, अब मैं जैसा चाहूंगा, वैसा करूंगा
सिर्फ एक-दो रंग नहीं
सारे, सातों के सातों रंग भरूँगा
आज, अभी, कल, परसों, नरसों, रोज
हर रोज भरूँगा, भरते रहूंगा, रंग -
लाल, पीले, हरे, नीले, गुलाबी, सफ़ेद
सुबह, शाम, दिन, रात, हर पहर !
देखना, जाते जाते, सतरंगी कर दूंगा -
नए साल को, बिलकुल वैसे -
जैसे - सतरगीं, इन्द्रधनुषी हैं ख़्वाब मेरे !!

देर से ही सही ...

देर से ही सही ...

सभी मित्रों को नव वर्ष की हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं ...

नया साल शुभा-शुभ हो, खुशियों से लबा-लब हो
न हो तेरा, न हो मेरा, जो हो वो हम सबका हो !!