Friday, August 6, 2010

इम्तिहां

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अब कुछ इस तरह भी, इम्तिहां मत लेना 'उदय'
जमीं पैरों तले की खिसकते रहे, और हम देखते रहें |

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Thursday, August 5, 2010

एक सबक : पटकनी

दो मित्र पप्पू-गप्पू जिन्दगी के सफ़र पर ... पप्पू को एक सेठ के यहां नौकरी मिल गई ... सेठ को घुड़सवारी घोड़ा दौड़ का शौक था उसने एक घोड़ा पाल रखा था ... घोड़ा की देख-रेख व् पालन-पोषण की जिम्मेदारी सौंप दी गई ... जल्द ही घुड-दौड़ होने वाली थी पर सेठ चिंतित था क्योंकि उसका घुड़सवार नौकरी छोड़ कर दूसरे सेठ के यहां चला गया था ... सेठ ने यह चिंता पप्पू के सामने जाहिर की तो पप्पू ने कहा मैं एक नया घुड़सवार ले आता हूं ... पर किसी अनुभवी घुड़सवार को लेकर आना क्योंकि "घुड-दौड़" शुरू होने वाली है ... आप चिंता करें मेरा मित्र है उसे सब कुछ सिखा दूंगा ... तब ठीक है ...

...पप्पू ने गप्पू को समझाया तथा नौकरी पर ले आया ... गप्पू को घुड-दौड़ व् घुड़सवारी की सम्पूर्ण जानकारी सिखाने लगा ... धीरे-धीरे गप्पू घुड़सवारी में माहिर हो गया ... और सीधा सेठ से संपर्क साधने लगा तथा पप्पू को नीचा दिखाने का भाव प्रदर्शित करने लगा ... साथ ही साथ उसे घुड़सवार होने का घमंड भी गया ... एक-दो अवसर पर उसने पप्पू को नीचा दिखाने कुशल घुड़सवार होने का दम दिखाने का प्रयास करते हुए नजरअंदाज करने का प्रयास भी किया ...

... पप्पू उसके हाव-भाव को देख समझ रहा था ... घोड़ा-दौड़ में एक सप्ताह का समय बचा था उसने गुपचुप तरीके से एक नए घुड़सवार की तलाश शुरू की तथा समय-समय पर सेठ को भी अपने ढंग से तैयारी बताते जा रहा था ... जैसे ही उसे एक नया घुड़सवार मिला उसने सेठ के सामने पेश किया तथा उसके अनुभव के आधार पर नियुक्त करने का प्रस्ताव रखा ... सेठ ने पप्पू की कार्यक्षमता व् प्रतिभा के आधार पर सुझाव पर सहमति प्रदाय कर दी ...

... दूसरे ही दिन पप्पू ने नए घुड़सवार को घोड़ा सौंपा तथा गप्पू को कहा ... घुड-दौड़ होने वाली है सेठ को तेरा काम पसंद नहीं आया तथा वह दौड़ हारना नहीं चाहते इसलिए नया घुड़सवार नियुक्त कर लिया है ... एक काम कर तू नई नौकरी की तलाश अपने स्तर पर कर मैं भी तेरे लिए एक नई नौकरी तलाश करता हूँ ... गप्पू बातें सुनकर तिलमिला गया और बोला इस नए घुड़सवार से अच्छा तो मैं घुड़सवारी करता हूँ ... मुझे मालुम है पर अभी तू शांत रह ... सेठ से झगड़ा भी नहीं कर सकते की तुझे क्यों निकाल दिया ...

... गप्पू तिलमिलाहट में इधर-उधर नई नौकरी की तलाश में भटकने लगा ... पर उसे नौकरी नहीं मिली ... धीरे-धीरे उसे यह भी समझ गया की पप्पू ने ही उसे "पटकनी" दी है क्योंकि जब वह उस नियुक्त नए घुड़सवार के पास बैठा तो उसे उसकी बातें सुनकर समझ आया की पप्पू ने ही उसे नौकरी पर लगवाया है ... नए घुड़सवार को सारे हालात मालुम थे इसलिए उसने गप्पू से कहा - यार एक छोटी-सी बात बोलता हूँ नाराज मत होना, ये मेरी जिन्दगी का भी कटु अनुभव है "बेटा कितना भी बड़ा क्यों हो जाए, पर बाप से बड़ा नहीं हो सकता "

Tuesday, August 3, 2010

ब्लागिंग एक नशा : मुक्ति का उपाय

यह कहना अतिशयोक्तिपूर्ण नहीं होगा की ब्लागिंग एक नशा है ! प्रमाणित करने के लिए भी ढेरों तर्क हैं ... सर्वप्रथम प्रमुख तौर पर ... आदमी सुबह बिस्तर से उठकर सबसे पहले कंप्यूटर "आन" करता है फिर बाथरूम जाता है ... दिन भर क्या करता होगा, नशे का आदि जो है .... रात को भी वही हाल बिस्तर पर जाने के पहले की क्रिया कंप्यूटर "आफ" करना होता है !

.... ये तो एक सिंपल उदाहरण है ... मैं यह नहीं कहता कि सभी लोग इस नशे के आदि हैं ... कुछ नहीं भी हैं ... और कुछ तो "चूरम-चूर" हो गए हैं ...

... खैर चिंतित होने की जरुरत नहीं है इस नशे से मुक्ति का उपाय भी है ... सर्वप्रथम सभी ब्लागर साथियों की राय भी जान लेना उचित समझ रहा हूं ... क्या सचमुच ब्लागिंग नशा है ? ... यदि है, तो मुक्ति के उपाय आपकी नजर में क्या हैं ??

विशेष टीप :- यह नशा मुझे भी तनिक-तनिक हो गया था !!!

Monday, August 2, 2010

ब्लॉगर ही ब्लॉगर हैं !

ब्लागिंग समुन्दर है
ब्लॉग कस्ती है
ब्लॉगर नाविक है
लहरें ही लहरें हैं
हिचकोले ही हिचकोले हैं
तूफां ही तूफां हैं
मौजे ही मौजे हैं

ब्लॉग रूपी कस्ती
बीच समुन्दर में
रह जाती है फ़स
नहीं दिखता रस्ता
झटके ही झटके हैं
गोते ही गोते हैं
समुन्दर ही समुन्दर है
ब्लॉगर ही ब्लॉगर हैं !

Sunday, August 1, 2010

रण है !

आतंकी दौर है तो क्या
रण है,
नक्सली खौफ़ है तो क्या
रण है,

बारूदी
ढेर है तो क्या
रण है,
पहाडी डगर है तो क्या
रण है,

खडे
रणक्षेत्र में हैं हम
रण है,
दिलों में धडकनें हैं हम
रण है,

खडे
हैं मोर्चे पे हम
रण है,
जुनूं है, जान हैं हम
रण है,

वतन
की आन हैं हम
रण है,
वतन की शान हैं हम
रण है !