Tuesday, June 8, 2010

नजर

कसम 'उदय' की
तुझे छूने को
हाथ भी न बढाऊंगा
न होने दूंगा
एहसास तुझको
इन नजरों से
तुझे छू कर
मैं चला जाऊंगा।

Monday, June 7, 2010

मानव धर्म क्या है !!!

यह सच है कि मेरे कदम आध्यात्म की ओर बढ रहे हैं ...

... इसी कडी में मैंने कल एक पोस्ट लिख कर आचार्य जी को ईमेल कर दी थी ...

... "मानव धर्म" ... अभी देखा वह पोस्ट उन्होंने अपने ब्लाग पर प्रकाशित की हुई है ...

... धन्य हैं आचार्य जी ...

... आईये आप भी पढें .... मानव धर्म क्या है !!!

... आप सभी से आग्रह है कि आप अपनी "कडवी-मीठी" प्रतिक्रिया अवश्य प्रदान करें .... आभार !!!!!

.... ये साधु भी ब्लागर है !!!

Sunday, June 6, 2010

.... धन्य है ब्लागदुनिया !!!

ब्लागजगत में कदम रखते समय कभी नही सोचा था कि "ब्लागदुनिया" सचमुच इतनी मायावी व प्रभावी होगी ... सचमुच चमत्कार से कम नही है .... न जाने कितने महापुरुषों से परिचय करा दिया ... सचमुच धन्य है ब्लागजगत !!! ... एक ऎसा प्लेटफ़ार्म जो अंतर्राष्ट्रीय पहचान देता है ... अदभुत है ... इसी क्रम में ... आप जानते हैं मैंने पिछली पोस्ट पर उल्लेख किया था कि आचार्य जी से मायावी ढंग से परिचय हो गया उन्होंने मुझे जो मान दिया ... सचमुच मैं उनका आभारी हूं ...

... आध्यात्म की ओर बढते कदम में ... कल मैंने एक लेख लिखा जिसे आचार्य जी को ईमेल कर दिया इस आशा के साथ ... संभवत: उन्हे पसंद आ जाये और उनके ब्लाग पर स्थान मिल जाये ... यही हुआ ... अभी सुबह उठकर देखा मेरा लेख प्रकाशित है ... कल क्या है !... आप सभी से भी आग्रह है कि आप मेरे आध्यात्मिक लेख पर अपनी अपनी "कडुवी अथवा मीठी" प्रतिक्रिया अवश्य प्रदान करें ... धन्यवाद ... आभार .... सचमुच .... .... धन्य है ब्लागदुनिया !!!

Saturday, June 5, 2010

... खुबसूरत नवयौवन लडकी !!

विगत कुछ दिनों से मेरा मन स्वमेव अध्यात्म की ओर बढ रहा है ... कुछ अध्यात्मिक लिखने का सोच रहा हूं ... पर क्या लिखूं, कैसे शुरु करूं .... मन में उथल-पुथल चल रही है ... पर ये तो तय है कि मेरे कदम अध्यात्म की ओर बढ रहे हैं ....

... कल एक खुबसूरत नवयौवन लडकी को गुलाबी फ़्राक पहने हुये संध्याकाल के समय बाजार में देखा ... सचमुच बहुत खुबसूरत लगी ... पर मैं यह सोचते रहा कि वह लडकी खुबसूरत है ... या मेरी आंखें उसे खुबसूरती की निगाह से देख रही हैं ... या फ़िर मेरा मन उसे खुबसूरत बना रहा है .... ये तीनों सवाल मेरे मन में बिजली की तरह कौंधने लगे ... कई घंटे मैं मनन - चिंतन करते रहा ... नतीजन मुझे यह मानना पडा कि ... मेरा मन उसे खुबसूरत बना रहा था !!

... क्या सचमुच मेरे कदम .... अध्यात्म की ओर बढते कदम हैं !!!