Friday, April 10, 2009

शेर - 26

बडा मुश्किल है जीना, यारों के चलन में
यारों से, रकीबों के रिवाज अच्छे हैं ।

Wednesday, April 8, 2009

टिप्पणी

"... धर्म-कर्म को छोड गया हूँ

जात-पात को भूल गया हूँ

प्याला हाथ में उठा लिया हूँ

सब से हाथ मिला लिया हूँ

गोरे-काले की बात नही है

ऊँच-नीच का भेद नही है

जाम-से-जाम लडा रहा हूँ

पी-पी कर अब झूम रहा हूँ ...।"

ये पंक्तियाँ आदरणीय महावीर जी के ब्लाग पर टिप्पणी स्वरूप प्रकाशित की गई हैं कभी फुर्सत मे पूर्ण कर प्रकाशित करने का प्रयास होगा।

Sunday, April 5, 2009

खामोशी ...

मेरी तन्हाई में आकर
तुम अक्सर मुझसे बातें करती हो
सामने रहकर
खामोश बनकर मुझसे बातें करती हो !

तुम चाह कर भी
जुबाँ से कुछ कहती नहीं
विदा होने पर
मिलने का वादा करती नहीं
क्या समझें हम तुम्हें
कि तुम चाहती हो
पर चाहत का इकरार करती नहीं !

सुना है लोग कहते हैं
कि जब तुम उनसे मिलती हो
तो सिर्फ मेरी ही बातें करती हो
पर जब मेरे पास होती हो
तब क्यों खामोश रहती हो !

ऎसा लगता है
कि तुम हर पल अपने आप से
सिर्फ मेरी ही बातें करती हो
पर जब मेरे पास होती हो
तब क्यों खामोश रहती हो !

अब क्या कहें अपने ‘दिल’ से
जब वो हमसे पूछता है
कि ‘उदय’ तेरी आशिकी
पत्थर दिल क्यों है!
अब क्या कहूँ
जब तुने मुझसे कुछ कहा नही !!

Saturday, April 4, 2009

बोल-अनमोल

“दृढ इच्छाशक्ति व मजबूत इरादों वाले जुनूनी व्यक्ति के लिये इस दुनिया में कुछ भी असंभव नही है।”

Thursday, April 2, 2009

बोल-अनमोल

“माँ के निर्देशों पर जो बच्चे चलते हैं उनके लिये माँ का आशिर्वाद व दुआएँ अजर-अमर हैं।”